भारतीय टीम ने विदेशी जमीन पर कई यादगार टेस्ट जीत हासिल की है लेकिन 2002 में मिली हेडिंग्ले की टेस्ट जीत अलग स्थान रखती है। सौरव गांगुली की कप्तानी में मिली इस पारी और 46 रन की जीत ने टीम इंडिया की पहचान को हमेशा के लिए बदल दिया। भारत ने इंग्लैंड को उसके ही मांद में हराकर न सिर्फ सीरीज में धांसू वापसी की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह घर से बाहर भी विपक्षी टीम को घुटनों पर ला सकती है।
उस दौर में भारतीय टीम को अक्सर घर का शेर कहा जाता था। विदेशों, खासकर इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका की तेज और उछालभरी पिचों पर भारत के प्रदर्शन पर लगातार सवाल उठते थे लेकिन हेडिंग्ले टेस्ट ने इन धारणाओं को पूरी तरह से बदल दिया। यह जीत इतनी खास थी कि दिग्गज लेग स्पिनर अनिल कुंबले इसे याद करते हुए कहते हैं, 'इसने हमारे अंदर यह विश्वास जगाया कि हम घर से बाहर भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।'
यह भी पढ़ें: जब घायल कपिल देव ने कंगारुओं का किया शिकार, भारत को दिलाई चमत्कारिक जीत
गांगुला का वह साहसिक फैसला
इंग्लैंड ने 4 टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट लॉर्ड्स में जीत लिया था, जबकि दूसरा टेस्ट ट्रेंट ब्रिज में ड्रॉ रहा। ऐसे में हेडिंग्ले में खेला जाने वाला तीसरा टेस्ट भारत की वापसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। अगर यह मुकाबला भी हाथ से निकल जाता, तो सीरीज जीतने की उम्मीदें लगभग समाप्त हो जातीं। दूसरी ओर इंग्लैंड भी कमर कसकर तैयार था। उसने टीम इंडिया को ढेर करने के लिए हेडिंग्ले में हरी पिच तैयार की थी। इस मैदान पर वैसे भी तेज गेंदबाजों का सिक्का चलता है और अब परिस्थितियां भी उनके अनुकूल थीं। तिस पर से आसमान में बादल छाए हुए थे। यानी ड्यूक गेंद बल्लेबाजों के लिए कहर बनने वाली थी।
परस्थितियों को देखते हुए कोई भी कप्तान टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करता लेकिन गांगुली ने इसके उलट बल्लेबाजी करने का फैसला किया। क्रिकेट एक्सपर्ट्स और इंग्लिश मीडिया को यह निर्णय हैरान करने वाला था लेकिन भारतीय टीम ने तय कर लिया था कि अगर टॉस जीतेंगे तो पहले बैटिंग करेंगे, अच्छा स्कोर बनाएंगे, दो स्पिनर खिलाएंगे और चौथी पारी में स्पिन के दम पर इंग्लैंड को हराएंगे। बाद में यही फैसला मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
यह भी पढ़ें: इंग्लैंड में भारत की पहली टेस्ट जीत की कहानी, जब स्टेडियम में हथिनी ले आए फैंस
द्रविड़ और बांगड़ ने इंग्लैंड को थकाया
भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (8) जल्दी आउट हो गए। इसके बाद राहुल द्रविड़ और दूसरे सलामी बल्लेबाज संजय बांगड़ ने मोर्चा संभाला और लगभग 70 ओवर तक इंग्लैंड को विकेट के लिए तरसाए रखा। उनके बीच 170 रन की साझेदारी हुई। बांगड़ ने मुश्किल परस्थितियों में इंग्लिश गेंदबाजों का डटकर सामना किया और 236 गेंद में बहुमूल्य 68 रन बनाए। यह वह पारी थी, जिसने द्रविड़ के साथ-साथ आने वाले बल्लेबाजों के लिए मंच तैयार किया।
द्रविड़ ने अपने चिर-परिचित अंदाज बैटिंग करते हुए 307 गेंद में 148 रन की बेहतरीन पारी खेली। उनके आउट होने के बाद सचिन तेंदुलकर डट गए। उस समय तक वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल हो चुके थे लेकिन इंग्लैंड की परिस्थितियों में लंबी पारी खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता था। सचिन ने पहले संयम दिखाया और फिर इंग्लैंड के गेंदबाजों की क्लास लगानी शुरू की। उनके कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव और कट शॉट्स ने इंग्लैंड की गेंदबाजी को तितर-बितर कर दिया। सचिन ने 330 गेंद पर 193 रन बनाए। यह उनके टेस्ट करियर की सबसे परिपक्व विदेशी पारियों में से एक मानी जाती है।
यह भी पढ़ें: जब भारतीय खिलाड़ियों के खून से लाल हो गई सबीना पार्क की पिच
द्रविड़-सचिन के बाद गांगुली की 'दादागिरी'
गांगुली ने भी बल्ले से उदाहरण पेश किया। विदेशी परिस्थितियों में उनकी बल्लेबाजी को लेकर अक्सर सवाल उठते थे लेकिन हेडिंग्ले में उन्होंने उन सभी आलोचनाओं का जवाब दिया। गांगुली ने 167 गेंद में 76.64 के स्ट्राइक रेट से 128 रन की आक्रामक पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 3 छक्के शामिल थे। एक ही पारी में द्रविड़, सचिन और गांगुली के शतकों से भारत ने 8 विकेट के नुकसान पर 628 रन का स्कोर खड़ा किया। यह उस समय विदेशी धरती पर भारत के सबसे बड़े टेस्ट स्कोर में से एक था। इंग्लैंड के गेंदबाज पूरी पारी के दौरान असहाय नजर आए। क्या मैथ्यू हॉगार्ड और एंड्रयू फ्लिंटॉफ... सभी बेअसर रहे।
भारतीय स्पिनरों का जादू
टीम इंडिया पहाड़ समान टोटल के दबाव में इंग्लैंड की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई। जहीर खान और अजीत अगरकर ने दोनों ओपनरों को निपटाया तो अनिल कुंबले और हरभजन सिंह की स्पिन जोड़ी ने इंग्लिश टीम के मिडिल ऑर्डर को ध्वस्त किया। अंग्रेज विकेटकीपर एलेक स्टीवर्ट (नाबाद 78) ने कुछ जुझारूपन दिखाया लेकिन कुंबले-हरभजन ने एक छोर से लगातार विकेट लेकर इंग्लैंड की पारी 273 रन पर समेट दी। भारत को 355 रन की विशाल बढ़त मिली। जहीर और अगरकर ने 2-2 विकेट लिए। वहीं सीमिंग कंडीशन्स में कुंबले-हरभजन ने 3-3 विकेट झटके।
इसके बाद गांगुली ने बिना किसी झिझक के इंग्लैंड को फॉलोऑन दे दिया। दूसरी पारी में भी मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने बेबस दिखी। इस बार बांगड़ ने भी अपनी मीडियम पेस बॉलिंग से कमाल दिखाया और 2 विकेट चटकाए। इंग्लैंड के 4 विकेट 148 रन पर गिर गए थे। अंग्रेज कप्तान नासिर हुसैन ने शतकीय पारी खेली लेकिन वह अकेले पड़ गए और अपनी टीम को पारी की हार से नहीं बचा पाए। भारत ने इंग्लैंड को 309 रन पर ऑलआउट कर पारी और 46 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। कुंबले ने 4 विकेट झटके। बांगड़े के खाते में 2 विकेट, जबकि जहीर-अगरकर और हरभजन के खाते में 1-1 विकेट रहे।
यह भी पढ़ें: अरुणाचल क्रिकेट में चल क्या रहा है, टीम का रणजी ट्रॉफी मैच रद्द क्यों हो गया?
इंग्लैंड में भारत की सबसे बेहतरीन जीत
हेडिंग्ले टेस्ट में टीम इंडिया ने लगभग हर सेशन को जीता। गांगुली की टीम ने इंग्लैंड को उसके ही घर में अपनी ताकत पर बुरी तरह पछाड़ वर्ल्ड क्रिकेट को हैरान कर दिया। यह 1986 के बाद इंग्लैंड में भारत की पहली टेस्ट जीत थी। इसे भारतीय टीम के तत्कालीन कोच जॉन राइट ने भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन विदेशी जीत बताया।
हेडिंग्ले की जीत से टीम में गजब का आत्मविश्वास आया। इसके बाद से भारत ने विदेशों में लगातार जीतना शुरू किया और अगले 8 सालों में खेले गए हर 10 टेस्ट मैचों में से 4 में जीत हासिल की। आज दो दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जब विदेशों में भारत की फेमस टेस्ट जीतों का जिक्र होता है, लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर मिली इस ऐतिहासिक जीत को गर्व के साथ याद किया जाता है। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि उस मानसिक बदलाव की मिसाल है जिसने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी।
