भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने कुछ ही महीनों पहले बड़ा फैसला लेते हुए टी दिलीप का कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़ाया था। हालिया समय में टीम इंडिया की खराब फील्डिंग प्रदर्शन के बाद बोर्ड ने दिलीप से नाता तोड़ लिया। इस तरह उनका टीम इंडिया के फील्डिंग कोच के तौर पर 5 साल का कार्यकाल खत्म हुआ। दिलीप के बाद शुभदीप घोष को टीम इंडिया की फील्डिंग को बेहतर बनाने का काम दिया गया लेकिन उनके कार्यकाल की शुरुआत भी बेहद निराशाजनक रही है।

 

एशियन गेम्स के बाद अब वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भारतीय खिलाड़ी एक के बाद एक कैच छोड़ रहे हैं। शुक्रवार (9 अक्टूबर) को रांची में खेले गए दूसरे टी20 मैच में मयंक यादव ने कैरेबियाई टीम के शरफेन रदरफोर्ड का आसान कैच टपका दिया। इसके बाद रदरफोर्ड ने ऐसी तूफानी बल्लेबाजी की, जिसने मैच की पूरी तस्वीर ही बदल दी। 

 

रदरफोर्ड का जब कैच छूटा, तब वह 18 गेंद में 38 रन बनाकर खेल रहे थे। इस समय वेस्टइंडीज की टीम 250 रन के टारगेट का पीछा करते हुए 9.5 ओवर में 3 विकेट खोकर 121 रन पर थी। अगर रदरफोर्ड का कैच लपका जाता तो वेस्टइंडीज की टीम पर दबाव बढ़ जाता और वह मुश्किल में आ सकती थी लेकिन मयंक ने उन्हें मौका दे दिया।

 

यह भी पढ़ें: Ranji Trophy: रविवार से शुरू होगा रणजी का रण, राहुल-जडेजा भी दिखाएंगे दम

रदरफोर्ड ने दी सजा

बाएं हाथ के बल्लेबाज रदरफोर्ड ने जीवनदान मिलने के बाद अगली ही गेंद पर छक्का लगा दिया। उन्होंने कैच छूटने के बाद 18 गेंद में 45 रन जड़े। रदरफोर्ड ने 37 गेंद में 7 चौके और 7 छक्कों की मदद से 84 रन की विस्फोटक पारी खेली। आउट होने से पहले उन्होंने शाई होप के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 54 गेंद में 120 रन की ताबड़तोड़ साझेदारी की, जिससे कैरेबियाई टीम ने विशाल रन चेज में जबरदस्त वापसी कर ली। 

 

रदरफोर्ड जब पवेलियन लौटे, तब वेस्टइंडीज को 35 गेंद में 72 रन ही चाहिए थे। होप और रोमारियो शेफर्ड ने 27 गेंद में ही बाकी बचे रन बटोर लिए और वेस्टइंडीज को जीत दिला दी। यह टी20 इंटरनेशनल में वेस्टइंडीज का सबसे सफल रन चेज रहा।

 

यह भी पढ़ें: IND vs WI: लखनऊ और रांची में बरसे रन, अब इंदौर में क्या होगा गेंदबाजों का हाल?

इस साल हर मैच में कैच छोड़ रही है टीम इंडिया

भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज शुरू होने से पहले इस साल 29 टी20 मैचों में 51 कैच टपकाए थे। इंटरनेशनल क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में टीम इंडिया की कैचिंग एफिशिएंसी सिर्फ 74.3 फीसदी रही है। यानी भारतीय खिलाड़ी हर 4 में से 1 कैच टपका दे रहे हैं। ये आंकड़े बता रहे हैं कि फील्डिंग का कितना खस्ता हाल है।

नए कोच पर बड़ी जिम्मेदारी

टी दिलीप के 5 साल लंबे कार्यकाल के आखिरी कुछ महीने छोड़ दें तो भारतीय टीम की फील्डिंग का लेवल उम्दा रहा था। टीम ने इस दौरान 3-3 ICC ट्रॉफी जीते। दिलीप ने 'बेस्ट फील्डर मेडल' की परंपरा भी शुरू की थी, जिसने टीम का माहौल बेहद खुशनुमा बना दिया था। अब उनके जाने के बाद नए फील्डिंग कोच शुभदीप घोष पर टीम की फील्डिंग के लेवल को वर्ल्ड क्लास बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। शुभदीप घोष ने शुरुआत में निराश किया है लेकिन 2027 वनडे वर्ल्ड कप के देखते हुए उन्हें जल्द ही कमियों पर काम करना होगा और उसे ठीक करना होगा।