एक आइडिया के तौर पर शुरू हुआ हायरॉक्स (Hyrox) आज के समय में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला फिटनेस स्पोर्ट्स बन चुका है। पिछले कुछ सालों में हायरॉक्स जितनी तेजी से लोकप्रिय हुआ है, उतनी तेजी से शायद ही कोई नया फिटनेस स्पोर्ट लोकप्रिय हुआ हो। भारत में भी लोगों के बीच इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। हालांकि, हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के बाद से इसको लेकर विवाद भी हुआ।
पहली घटना, बेंगलुरु में हुए हायरोक्स इवेंट के बाद इस फिटनेस स्पोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। इसमें करीब 9,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। दावा किया जा रहा है कि इससे लगभग 8.1 करोड़ की संभावित कमाई हुई, इसी को लेकर बहस तेज हो गई। एक और घटना, बीजिंग में हुए इवेंट से सामने आई, जब एक ऑस्ट्रेलियाई एथलीट जोआना विएट्रजिक ने रेस रेस के दौरान ही वो बीमार पड़ गई थीं और अनजाने में उन्होंने कपड़ों में ही मल त्याग दिया था।
बता दें कि हायरॉक्स फॉरमेट की शुरुआत जर्मनी के इवेंट ऑर्गनाइजर क्रिस्टियान टोएत्स्के, कम्युनिकेशन एक्सपर्ट मिषाएल ट्राउटमैन और पूर्व हॉकी खिलाड़ी मोरित्स फ्युर्स्टे ने की थी। बता दें कि फ्युर्स्टे 2008 और 2012 में ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली जर्मन हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं।
तीनों का आइडिया बहुत ही सरल था, उन्हें ऐसा खेल बनाना था, जिसमें दौड़ भी हो और जिम वाला शक्ति परीक्षण भी। बता दें कि इस हायरॉक्स में आठ चरण होते हैं, इस दौरान एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक आठ बार एक-एक किलोमीटर दौड़ना होता है। हर राउंड में पहले 1 किमी दौड़ना होता है, फिर एक स्टेशन पर स्ट्रेंथ और स्टैमिना से जुड़ी एक्सरसाइज करनी होती है।
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मोरित्स फ्युर्स्टे ने क्या बताया?
DW से खास बातचीत में मोरित्स फ्युर्स्टे ने बताया, 'लोगों का या तो खुद को चुनौती देना पसंद होता है या फिर दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करना, वे ऐसे खेल में हिस्सा लेना पसंद करते हैं, जिसमें अपने भीतरी दानव से लड़ाई भी शामिल हो।' उन्होंने कहा कि इंसान ऐसा शताब्दियों से करता आया है, हायरॉक्स ने तो बस इसे एक प्रतिस्पर्धा के सांचे में ढाला है।
हायरॉक्स शुरू करने वालों को मानना है कि दुनिया में अलग-अलग खेलों के लिए पहले से तय खेल मौजूद हैं लेकिन जिम और फिटनेस करने वालों के लिए कोई ऐसा बड़ा और तय फॉर्मेट नहीं था, जिसमें वे खुद को आजमा सकें। आसान भाषा में कहें तो फुटबॉल, टेनिस और हॉकी जैसे खेलों के अपने नियम और प्रतियोगिताएं हैं। जिम में मेहनत करने वाले लोगों के लिए ऐसा कोई ग्लोबल खेल नहीं था, जिसमें उन्हें अपनी फिटनेस को प्रतियोगिता के तौर पर परखने का मौका मिले।
हायरॉक्स इसी कमी को पूरा करता है। इसका मकसद केवल अच्छा दिखना या फिट रहना नहीं है, बल्कि इसमें लोग यह भी देख सकते हैं कि वे कितनी तेजी से दौड़ सकते हैं, कितना वजन उठा सकते हैं और कितनी देर तक लगातार मेहनत कर सकते हैं।
हायरॉक्स में क्या होता है?
हायरॉक्स में कुल 8 किलोमीटर दौड़ना होता है लेकिन पूरी दौड़ एक साथ नहीं होती। इसमें पहले 1 किलोमीटर दौड़ना होता है, फिर एक फिटनेस एक्सरसाइज करनी होती है। इसके बाद फिर 1 किलोमीटर दौड़ना होता है और फिर दूसरी एक्सरसाइज। ऐसा करते हुए कुल 8 बार 1-1 किलोमीटर की दौड़ और 8 अलग-अलग फिटनेस एक्सरसाइज पूरी करनी होती हैं।
इसके लिए केवल तेज दौड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में ताकत और स्टैमिना दोनों होना जरूरी है। मोरित्स फ्युर्स्टे का कहना है कि लोगों को खुद को चुनौती देना और दूसरों से मुकाबला करना पसंद है। हायरॉक्स इसी सोच को एक खेल का रूप देता है।
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ओलांपिक में जगह दिलाने की कोशिश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हायरॉक्स के संस्थापकों की नजर अब 2032 के ब्रिस्बेन ओलंपिक पर है। मोरित्स फ्युर्स्टे खुद दो बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। अब उनकी इच्छा है कि जिस ओलंपिक मंच पर उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर गोल्ड मेडल जीता था, उस मंच पर हायरॉक्स को भी जगह मिले।
हायरॉक्स अब दुनिया के कई देशों में पहुंच चुका है और लोगों में इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। मौजूदा सीजन में 10 लाख से ज्यादा लोगों के हायरॉक्स इवेंट्स में हिस्सा लेने का अनुमान बताया गया है। यह सिर्फ जिम में एक्सरसाइज करने का तरीका नहीं रह गया है। यह अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फिटनेस इवेंट का रूप ले रहा है।
