झारखंड में विकास योजनाओं की रफ्तार काफी धीमी है, जिसकी वजह से जनता के करोड़ों रुपये अटके हुए हैं। CAG की स्टेट फाइनेंसेस ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक राज्य में 155 बड़ी विकास परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। इन सभी परियोजनाओं पर कुल 3,879.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। इनमें से 2,169.89 करोड़ रुपये यानी करीब 56% पैसा खर्च भी हो चुका है लेकिन इसके बावजूद ये परियोजनाएं अब तक अधूरी पड़ी हैं।

 

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, इन अधूरी परियोजनाओं की वजह से सरकार का 2,169.89 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये प्रोजेक्ट अपने तय समय से 1 साल से लेकर 12 साल तक लेट चल रहे हैं। प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं होने की वजह से एक तरफ लोगों को उनका तय फायदा नहीं मिल पा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार पर कर्ज के ब्याज और दूसरी देनदारियों का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ रहा है।

 

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74 परियोजनाएं ग्रामीण कार्य विभाग की

विभाग दर विभाग आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 74 योजनाएं ग्रामीण कार्य विभाग की अधूरी हैं। इनकी अनुमानित लागत 812.35 करोड़ रुपये है, जबकि अब तक 352.58 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद पथ निर्माण विभाग की 43 परियोजनाएं अधूरी हैं। इनकी कुल लागत 1,748.72 करोड़ रुपये है और इनमें से 942.35 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी काम पूरा नहीं हुआ है।

 

इसके अलावा जल संसाधन विभाग की 18, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की 9, ग्रामीण विकास विभाग की 7 और भवन निर्माण विभाग की 4 योजनाएं अभी भी अधूरी हैं। इन सभी योजनाओं को पूरा करने में क्रमशः 720.19 करोड़, 358.61 करोड़, 54.08 करोड़ और 185.27 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

 

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12 साल से लटकी है 56.79 करोड़ की योजना

CAG के आयु-वार विश्लेषण के मुताबिक, साल 2011-12 में शुरू हुई एक परियोजना 12 साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अधूरी पड़ी है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 56.79 करोड़ रुपये थी, जिसमें से अब तक 40.80 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

 

इसके अलावा, 2013-14 में शुरू हुई 12.19 करोड़ रुपये की एक परियोजना भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं, 2016-17 में शुरू की गई 2 परियोजनाओं पर कुल 113.60 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, जबकि 2018-19 में शुरू हुई 3 परियोजनाओं की कुल लागत 58.49 करोड़ रुपये है। ये सभी परियोजनाएं भी अभी तक अधूरी पड़ी हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा अधूरी परियोजनाएं हाल के वर्षों की हैं। 2023-24 की 74 परियोजनाएं और 2024-25 की 43 परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।