उत्तर प्रदेश के जिला आगरा में साइबर ठगों ने आतंकवादियों से संबंध होने का डर दिखाकर नगर निगम के एक सेवानिवृत्त लेखाकार से 72.74 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को जांच के नाम पर अपने जाल में फंसाया। उन्हें धमकी दी गई कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल आतंकियों ने बैंक खाता खोलने में किया है और खाते में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त होने और परिवार के जेल जाने का डर दिखाकर आरोपियों ने उनकी जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली। ठगी का खुलासा होने के बाद साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पीड़ित विनोद कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, 21 अगस्त को उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को आगरा पुलिस लाइन से बताया और कहा कि एटीएस के अधिकारी उनसे बात करना चाहते हैं। इसके बाद कथित अधिकारियों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कर्नाटक में आईसीआईसीआई बैंक में खाता खोला गया है। उस खाते में 3.50 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है और इसके बदले उन्हें 35 लाख रुपये कमीशन मिला है।
आरोपियों ने उन्हें बताया कि आतंकियों को पकड़ा जा चुका है और अब उनकी बारी है। गिरफ्तारी, मकान और संपत्ति जब्त करने के साथ बैंक खाते बंद किए जाने की धमकी दी गई। परिवार के सदस्यों को भी जांच में फंसाने और जेल भेजने का डर दिखाया गया। इन धमकियों से घबराकर बुजुर्ग आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।
यह भी पढ़ें: कैफे संचालक की संदिग्ध मौत, मां का आरोप- गर्लफ्रेंड ने बेटे को मारकर फेंका!
चार खातों में ट्रांसफर कराए 72.74 लाख
जालसाजों ने बुजुर्ग की जमा पूंजी हासिल करने के लिए उनकी सावधि जमा और आवर्ती जमा की जानकारी ली। इसके बाद एफडी तुड़वाकर रकम बचत खाते में जमा कराई गई और अलग-अलग खातों में रुपये भेजने के निर्देश दिए गए। पीड़ित के अनुसार, 27 अगस्त से 18 सितंबर के बीच चार खातों में कुल 72 लाख 74 हजार 900 रुपये ट्रांसफर कराए गए।
रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई, ताकि ठगी का पता लगाना मुश्किल हो। सेवानिवृत्ति के बाद जमा की गई जीवनभर की बचत इस जालसाजी की भेंट चढ़ गई। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने अपने परिवार को जानकारी दी और साइबर अपराध की शिकायत की।
यह भी पढ़ें: चलती CNG कार बनी आग का गोला, सेंट्रल लॉक नहीं खुला तो जिंदा जला ड्राइवर
परिवार से बात करने पर भी लगाई रोक
आरोपियों ने पीड़ित को पत्नी और बेटों से इस मामले की चर्चा नहीं करने की हिदायत दी थी। उन्हें डर था कि यदि परिवार को जानकारी दी तो कथित जांच और गिरफ्तारी का खतरा बढ़ जाएगा। इसी दबाव में बुजुर्ग कई सप्ताह तक आरोपियों के निर्देशों पर चलते रहे। 23 सितंबर तक उनके पास अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप और वीडियो कॉल आती रहीं।
बाद में परिवार को जानकारी मिलने पर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों की पड़ताल कर रही है, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी, और आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
