पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सत्ता का साथ छोड़कर बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा करके वाले हुमायूं कबीर एक बार फिर चर्चा में हैं। वह अब नौदा से विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हैं और आज वह मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत करते हुए अब उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं।  उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और उनके साथ हुए व्यवहार से वह बेहद निराश हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रेजीनगर सीट पर भारतीय जनता पार्टी की जीत होगी। 

 

हुमायूं कबीर ने बुधवार को मीडिया से बात की और इस दौरान वह भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं, वह पश्चिम बंगाल विधानसभा नहीं जाएंगे और सदन के किसी भी सत्र में शामिल नहीं होगें। उन्होंने कहा, 'मैं मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा विधानसभा सीट के लोगों से माफी भी मांगूंगा। जरूरत पड़ी तो मैं अपने राजनीतिक जीवन से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लूंगा।'

 

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खुद की पार्टी बनाई

हुमायुं कबीर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही ममता बनर्जी की पार्टी का साथ छोड़कर अलग होने का फैसला कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा भी की थी और खुद की पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में भी कूद गए थे। उन्होंने खुद मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा और रेजीनगर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में वह दोनों सीटों पर जीत गए थे और बाद में उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखने का फैसला किया और रेजीनगर से इस्तीफा दे दिया। रेजीनगर सीट पर मंगलवार को उपचुनाव हुआ। 

 

ऑन कैमरा रोए

हुमांयु कबीर को वोटिंग के दिन पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। पार्टी ऑफिस के बाहर पुलिस के साथ उनका टकराव देखने को मिला था। इसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें कमीज से पकड़कर गाड़ी में बैठा लिया और उन्हें 12 घंट उन्हें हिरासत में रखा। इस दौरान हुमांयु कबीर काफी गुस्से में दिखाई दिए। इसके एक दिन बाद उन्होंने मीडिया से बात की और वह भावुक हो गए। 

 

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राजनीति से संन्यास के दिए संकेत 

उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी पद पर रहेंगे, वे विधानसभा नहीं जाएंगे और अपने इस फैसले के लिए नौदा की जनता से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अगर नौदा के लोग उनकी बात से सहमत होते हैं, तो वह जनता की राय मानेंगे। इसके लिए वह चाहे 1,000 लोगों को बुलाएं या 10,000 लोगों को, अगर उनमें से 60 प्रतिशत लोग कहते हैं कि उन्हें पद छोड़ देना चाहिए, तो वह विधायक पद से भी इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें पद छोड़ने की अनुमति देती है, तो वह नौदा के विधायक पद से इस्तीफा देने का वादा करते हैं।