इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को आदेशों पर लापरवाही बरतने के लिए कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट का मानना है कि यूपी पुलिस के सीनियर अधिकारी हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करने में लापरवाही कर रहे हैं। इसी सिलसिले में हाई कोर्ट ने यूपी के डीजीपी राजीव कृष्णा को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि आखिर पुलिस अधिकारी इन दिनों कोर्ट के आदेशों का पालन करने में क्यों हिचक रहे हैं? दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस समीर जैन की पीठ हत्या के आरोप से जुड़े एक केस में पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने डीजीपी को पेश होने का आदेश दिया।
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हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
इसी के साथ में कोर्ट ने मामले में 16 जुलाई 2026 को यूपी सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया। यह हलफनामा 21 जून 2025 की घटना से जुड़ा हुआ है, जिसमें घटना के बताए गए समय और सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले समय के बीच अंतर को स्पष्ट करना था।
सरकार को बार-बार पत्र भेजे
हालांकि, निर्धारित निर्देश के बावजूद यूपी सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान अपर सरकारी वकील एसबी मौर्य ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस बारे में दो बार सरकार को पत्र भेजे लेकिन इसके बावजूद जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
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हाई कोर्ट की टिप्पणी
इसी बात से नाराज होकर हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया। जस्टिस समीर जैन ने सुनवाई को दौरान टिप्पणी की, 'यह इस अदालत का घोर अनादर है। अब अदालत के सामने ऐसी स्थिति बहुत बार आ रही है, जिसमें पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने में हिचकिचाते नजर आते हैं।'
