आजकल कई मंहगे ब्रांड्स के जूते लोग खरीद तो रहे हैं लेकिन यह जूते उनकी उम्मीद के अनुसार चलते नही हैं। ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ से सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने चंडीगढ़ के एलांते मॉल से 12,999 यानी करीब 13 हजार रुपये की कीमत का एक जूता खरीदा। यह जूता उन्होंने  स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनी ASICS India Pvt. Ltd.से लिया था। इसके बाद जूता एक महीने से भी कम समय में खराब हो गया। इसके बाद उस व्यक्ति ने एलांते मॉल में उसी कंपनी के स्टोर पर संपर्क किया लेकिन कंपनी ने उनकी समस्या का उचित समाधान नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

 

जिस व्यक्ति ने यह जूते खरीदे थे उसका नाम अजय मलिक है और उसने डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में अजय ने बताया कि 30 अगस्त 2020 को वह एलांते मॉल में स्थित  स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनी ASICS India Pvt. Ltd. के स्टोर में गया था। उसने यहां से जूते खरीदे थे जिनकी कीमत 12999 रुपये थी। डिस्काउंट के बाद उसे यह जूते 4,499 रुपये में मिल गए थे। सितंबर के आखिरी हफ्ते में अजय की एडी में दिक्कत होने लगी तो उसने जूतों की जांच की। 

 

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एक महीने से कम में खराब हुए जूते

अजय मलिक ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह सुबह पंचकूला-चंडीगढ़ रोड़ पर रनिंग करते हैं। इसी दौरान एक दिन उनकी एडी दर्द करने लगी और जब उन्होंने जूता निकालकर देखा तो वह हैरान रह गए थे। उन्होंने देखा कि जूते की सोल अलग हो चुकी है और दोनों तरफ से वह खराब हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने कंपनी के स्टोर पर जूते वापिस किए और कंपनी ने उनका कलेम अप्रूव कर दिया। इसके बाद कंपनी के पास उसी तरह के दूसरे जूते नहीं थे इसलिए उन्होंने शिकायतकर्ता को उसी कीमत पर कोई दूसरे जूते खरीदने के लिए कहा गया। कंपनी ने जूते बदले नहीं बल्कि शिकायतकर्ता को 6000 रुपये का क्रेडिट वाउचर लेने के लिए कहा। हालांकि, शिकायतकर्ता ने कहा कि या तो उसे दूसरे जूते दिए जाएं या फिर उसके पैसे वापिस दिए जाएं। 
कंपनी ने क्या बताया?

कंपनी ने शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान नहीं किया। इसके बाद उसने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने कोर्ट में माना कि शिकायकर्ता ने 12 सितंबर 2020 को खराब जूतों की शिकायत की थी। कंपनी ने कहा कि उन्हें उसके बदले दूसरे विकल्प दिए गए। हालांकि, कंपनी ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता ने उनसे ज्यादा पैसों की मांग की और किसी समाधान के बजाय शिकायत करने का फैसला लिया। कंपनी ने इस दावे को खारिज कर दिया कि जूते में खराबी के कारण उपभोक्ता को कोई गंभीर दिक्कत हो सकती थी। 

कोर्ट ने क्या बताया?

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने खरीद का बिल, शिकायत से जूड़े सबूत, जूतों की तस्वीरें और अन्य दस्तावेज आयोग के सामने पेश किए। दूसरी ओर कंपनी ने अपनी जांच  रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जूतों में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं मिला और इसलिए दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि जूते खरीद के बहुत कम समय बाद ही खराब हो गए। इतने कम समय में किसी प्रतिष्ठित ब्रांड के रनिंग शूज का सोल उखड़ जाना सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि कंपनी ने केवल अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट पर भरोसा किया, लेकिन ऐसा कोई स्वतंत्र औप विश्वसनीय सबूत भी पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि खराबी उपभोक्ता के गलत उपयोग के कारण हुई थी। आयोग ने माना कि कंपनी उपभोक्ता की शिकायत का संतोषजनक समाधान देने में विफल रही।

कोर्ट ने माना उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन

कोर्ट ने कंपनी को इस मामले में दोषी माना और कहा कि कंपनी ने खुद उपभोक्ता को जूते बदलने का ऑफर दिया था और बाद में उसे पूरा नहीं कर पाई। फैसले में आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(11) के तहत 'सेवा में कमी' तथा धारा 2(47) के तहत 'अनुचित व्यापार व्यवहार' की अवधारणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उपभोक्ता को गुणवत्ता युक्त उत्पाद उपलब्ध कराना और वास्तविक शिकायत होने पर प्रभावी समाधान देना निर्माता एवं विक्रेता दोनों की जिम्मेदारी है। अगर महंगा प्रोडक्ट सामान्य उपयोग के दौरान बहुत कम समय में खराब हो जाए और कंपनी बिना पर्याप्त आधार के दावा अस्वीकार कर दे, तो यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है।

 

आयोग ने यह भी कहा कि कंपनियां केवल अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर हर शिकायत को खारिज नहीं कर सकतीं। जब उनके प्रोडक्ट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं और प्रोडक्ट असामान्य रूप से जल्दी खराब हो जाता है, तब निर्माता पर यह दायित्व होता है कि वह ठोस और निष्पक्ष सबूत के आधार पर अपनी बात साबित करे। इस मामले में कंपनी ऐसा करने में असफल रही।

 

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कंपनी पर लगाया जुर्माना

इन्हीं सबूतों के आधार पर कंपनी की गलती मानी गहई और आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए ASICS India और संबंधित पक्षों को संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को 6,499 रुपये की खरीद राशि ब्याज के साथ वापस करने, 10,000 रुपये मानसिक तनाव और उत्पीड़न के लिए तथा 6,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करने का निर्देश दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि निर्धारित अवधि (60 दिन) के भीतर राशि का भुगतान नहीं होने पर उस पर नियमानुसार ब्याज भी देना पड़ेगा। यह फैसला उन सभी उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की जानकारी भी देता है जो मंहगे ब्रांड्स का सामान खरीदने पर ठगा हुआ महसूस करते हैं।