संजय सिंह, पटना। बिहार में खेती और शिक्षा को जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। अब राज्य के सैकड़ों स्कूलों के छात्र सिर्फ किताबों में कृषि विज्ञान नहीं पढ़ेंगे, बल्कि खुद मिट्टी की जांच कर उसकी गुणवत्ता समझेंगे और किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए जरूरी जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे। कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है।

 

मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए इस योजना को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ-साथ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित करेगी।

 

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स्कूलों में बनेगी मिट्टी की प्रयोगशाला

कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के 160 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब स्थापित की गई थी। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाकर 629 विद्यालयों तक किया जा रहा है। इन प्रयोगशालाओं में कक्षा 7, 8, 9 और 11 के छात्र-छात्राएं मिट्टी का नमूना संग्रहण, परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेंगे। इससे विद्यार्थियों में अनुसंधान, तकनीकी कौशल और कृषि विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी।

किसानों को मिलेगा सॉयल हेल्थ कार्ड

प्रत्येक विद्यालय को 50 मिट्टी नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य दिया गया है। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपनी भूमि की वास्तविक जरूरत के अनुसार उर्वरकों का उपयोग कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एक लाख रुपये में बनेगी हर लैब

सरकार ने प्रत्येक मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब की स्थापना के लिए एक लाख रुपये की लागत तय की है। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी। कृषि विभाग का मानना है कि यह मॉडल स्कूल, छात्र और किसान के बीच एक मजबूत समन्वय स्थापित करेगा।

 

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ड्रैगन फ्रूट खेती को भी मिलेगा बढ़ावा

समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत पिछले तीन वर्षों के लिए तीन करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 60 लाख रुपये में से 13.62 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी दी गई है।

कृषि में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार कृषि के आधुनिकीकरण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। स्कूलों में सॉयल टेस्टिंग लैब और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने से कृषि क्षेत्र में नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि इसका लाभ सीधे किसानों और विद्यार्थियों तक पहुंचे।