बिहार में कानून-व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है,  जहां एक तरफ हत्या, डकैती और लूट जैसे बड़े अपराधों में भारी गिरावट आई है। वहीं नक्सल विरोधी अभियान के कारण अब राज्य का एक भी जिला उग्रवाद प्रभावित नहीं बचा है। यह जानकारी गृह विभाग की होम सिक्योरिटी बैठक के बाद डीजीपी (DGP) विनय कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम, एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार, गृह सचिव प्रणव कुमार और स्पेशल सेक्रेट्री होम डिपार्टमेंट क्षेत्रनील सिंह ने दी।

 

गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में राज्य में हत्या के मामले में 10 की गिरावट आई है। डकैती के मामले 31और लूट के मामले 18 कम हुए हैं। डीजीपी  विनय कुमार ने कहा कि पुलिस की सख्ती और बेहतर मॉनिटरिंग की वजह से अपराधियों में डर है। पहले साल में 15000 के करीब दंगे होते थे। अब यह आंकड़ा 100 तक आ गया है। उन्होंने कहा कि हत्या के ज्यादातर मामले अब प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद और पारिवारिक विवाद की वजह से हो रहे हैं। यह सीधे समाज से जुड़ी समस्या है।

 

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अब बिहार नक्सल प्रभावित नहीं

 

डीजीपी ने सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि नक्सल विरोधी अभियान की सफलता के कारण राज्य में अब एक भी जिला उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बहुत खतरनाक थी। नक्सली बड़े पैमाने पर फैले थे। मुंगेर के SP तक को नक्सलियों ने मार दिया था। अब सभी प्रभावित क्षेत्रों को टूरिज्म, शिक्षा और उद्योग के जरिए विकसित करने की योजना है।

 
पुलिस बल को मजबूत करने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर भर्ती कर रही है। डीजीपी ने बताया कि डेढ़ साल में 22,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती हो चुकी है। 26,574 पदों पर बहाली की प्रक्रिया चल रही है जो 1 साल में पूरी हो जाएगी। इस तरह डेढ़ साल में 50,000 से अधिक पुलिसकर्मी विभाग को मिल जाएंगे। इसके साथ ही राज्य में 600 थाना भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है। डायल 112 को और मजबूत करने के लिए 172 करोड़ की योजना से नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। पटना में पुलिस का एक बड़ा और आधुनिक साइबर सेल भवन भी बनेगा।

 

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नशा और ह्यूमन ट्रैफिकिंग बड़ी चुनौती

 

डीजीपी ने कहा कि पुलिस के सामने अब नशा और ह्यूमन ट्रैफिकिंग सबसे बड़ी चुनौती है।उन्होंने कहा कि हमारे युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। ट्रक के ट्रक गांजा और ड्रग्स पकड़े जा रहे हैं। नेपाल, नॉर्थ ईस्ट और बाहर के लोग इस सप्लाई में लगे हैं। नशे को रोकना सिर्फ पुलिस का काम नहीं है। समाज को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की चोरी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण अशिक्षा और गरीबी है। सिर्फ पुलिस पर जिम्मेदारी डालने से समस्या दूर नहीं होगी। समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा।

 मिलेगा 'प्रेसिडेंट कलर अवार्ड'

 बिहार पुलिस को प्रेसिडेंट कलर अवार्ड मिला है । डीजीपी ने कहा कि यूपी को यह अवार्ड 1954 में ही मिल गया था। बिहार को पहली बार यह सम्मान मिल रहा है। इस बार वीरता के लिए 18 पुलिसकर्मियों को पुरस्कार दिया गाया । इनमें सबसे ज्यादा सिपाही और हवलदार हैं। एक महिला एसपी , एक डीएसपी और एक आईजी रैंक के अधिकारी को भी यह अवार्ड मिलेगा।

 

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पटना के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर डीजीपी ने कहा कि मामले की ज्यूडिशियल इंक्वायरी चल रही है। उन्होंने कहा कि जिस पुलिसकर्मी ने अधिक बल का प्रयोग किया है उसकी जांच हो रही है। AK-47 चलाना कानून में वर्जित है। घटना में शामिल पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया गया है। अन्य की भूमिका की भी जांच चल रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।