बिहार में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए राज्य में 10 एयरपोर्ट परियोजनाओं पर एक साथ काम चल रहा है। रक्सौल से लेकर पूर्णिया और मुजफ्फरपुर से लेकर सहरसा तक एयरपोर्ट के निर्माण और विकास का काम आगे बढ़ रहा है।

 

नागरिक उड्डयन विभाग के अनुसार, कई एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है जबकि कई जगह टर्मिनल और रनवे के काम के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। विकास आयुक्त कोषांग सभी विभागों के साथ मिलकर इन परियोजनाओं की मॉनिटरिंग कर रहा है।

 

राज्य सरकार का लक्ष्य पटना और दरभंगा के अलावा उत्तर बिहार, सीमांचल और कोसी के लोगों को भी हवाई सुविधा देना है। एयरपोर्ट के विकास से इन क्षेत्रों में आने-जाने की सुविधा बेहतर होगी। साथ ही व्यापार, निवेश, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कब शुरू होगी हवाई सेवा?

सीमावर्ती क्षेत्र के लिए अहम रक्सौल एयरपोर्ट के विकास में बड़ी प्रगति हुई है। यहां एयरपोर्ट के लिए जरूरी जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। अब एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी की टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। रनवे विस्तार से जुड़े काम की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

 

सरकार ने रक्सौल एयरपोर्ट का निर्माण और कमीशनिंग अप्रैल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। रक्सौल की सीमावर्ती और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए एयरपोर्ट शुरू होने से उत्तर बिहार और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हवाई संपर्क बेहतर होगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट के विकास का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां टर्मिनल भवन, प्री-इंजीनियर्ड ATC टावर, फायर स्टेशन और अन्य भवनों के निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है। इसकी लागत GST सहित 27.67 करोड़ रुपये है।

 

इसके अलावा रनवे, एप्रन, टैक्सीवे, GSE, बेसिक स्ट्रिप स्ट्रेंथनिंग और ग्रेडिंग, एयरसाइड ड्रेनेज समेत अन्य कामों के लिए भी वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। इसकी लागत GST सहित 31.20 करोड़ रुपये है। दोनों कामों की कुल लागत करीब 58.87 करोड़ रुपये है।

 

मुजफ्फरपुर में एयरपोर्ट शुरू होने से उत्तर बिहार के लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी। पूर्णिया एयरपोर्ट पर न्यू सिविल एन्क्लेव के विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। यहां यात्रियों की सुविधाओं के लिए नया टर्मिनल बनाया जाएगा।

 

तय समय के अनुसार प्रोजेक्ट को मई 2028 तक पूरा करने और जून 2028 तक कमीशनिंग का लक्ष्य रखा गया है। पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू होने से सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों को सीधे हवाई सेवा मिल सकेगी। इससे इन क्षेत्रों के लोगों के लिए दूसरे शहरों तक पहुंचना आसान होगा।

बीरपुर और वाल्मीकिनगर में काम तेज

बीरपुर एयरपोर्ट को Code-2B प्रकार के विमानों के लिए विकसित किया जा रहा है। यहां टर्मिनल भवन, ATC टावर, फायर स्टेशन, सिटी-साइड डेवलपमेंट और इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे कामों की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। रनवे, एप्रन, टैक्सीवे और अन्य एयरसाइड काम भी प्रक्रिया में हैं।

 

वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट में भी टर्मिनल भवन, ATC टावर, फायर स्टेशन, सिटी-साइड डेवलपमेंट और इलेक्ट्रिफिकेशन के कामों की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। रनवे, एप्रन और टैक्सीवे सहित अन्य एयरसाइड काम भी प्रक्रिया में हैं। वाल्मीकिनगर पर्यटन के लिहाज से अहम है। एयरपोर्ट बनने से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

सहरसा एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन, ATC टावर, फायर स्टेशन और अन्य कामों के लिए मिली बोली काफी कम होने के कारण दोबारा टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। रनवे, एप्रन, टैक्सीवे और अन्य एयरसाइड कामों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। सहरसा में एयरपोर्ट शुरू होने से कोसी क्षेत्र के लोगों को हवाई यात्रा के लिए पटना जाने की जरूरत कम होगी।

 

फारबिसगंज एयरपोर्ट को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम-मॉडिफाइड उड़ान के चैलेंज मोड के तहत विकसित करने के लिए बिहार सरकार ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से सहमति मांगी है। वहीं गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट के ब्राउनफील्ड एयरस्ट्रिप के प्री-फीजिबिलिटी अध्ययन में एयरपोर्ट का विकास तकनीकी रूप से संभव पाया गया है। इसके लिए OLS सर्वे कराने और RCS-मॉडिफाइड उड़ान के तहत विकास के लिए सहमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

किशनगंज में रनवे बनेगा

किशनगंज एयरपोर्ट के मौजूदा 1,000 मीटर रनवे को 1,000 मीटर और बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके लिए करीब 24.70 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। रनवे विस्तार के बाद यहां बड़े विमानों की लैंडिंग हो सकेगी। छपरा एयरपोर्ट के अध्ययन में सीमित जमीन और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र के कारण तकनीकी और परिचालन से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं। 

 

वहीं बेगूसराय के उलाव एयरपोर्ट में बरौनी ऑयल रिफाइनरी की नजदीकी, NH-31 के समानांतर रनवे विस्तार के लिए जमीन की कमी और आसपास की बस्तियों को बड़ी चुनौती माना गया है। दोनों एयरपोर्ट के OLS सर्वे के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से अनुरोध किया गया है।