बिहार में टीबी उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। पटना के लोक भवन में आयोजित टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान अब पूरे बिहार में चलाया जाएगा। इसमें राज्यपाल का भी सहयोग मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य बिहार से टीबी को पूरी तरह खत्म करना है। इसके लिए मरीजों की पहचान, इलाज और लोगों को जागरूक करने पर बड़े स्तर पर काम किया जाएगा।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना देश से टीबी को खत्म करना है। इसी लक्ष्य को लेकर बिहार सरकार भी काम कर रही है। बिहार में टीबी के मरीजों की संख्या अभी भी काफी है। इसे खत्म करने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों की जांच की जाएगी टीबी के लक्षणों के बारे में बताया जाएगा और मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए सभी जिलों में अभियान चलाने की तैयारी की है।

 

यह भी पढ़ें: औरंगाबाद में युवक की पीट-पीटकर हत्या, अलंकार ज्वेलर्स के मालिक समेत 5 गिरफ्तार

गांव-गांव होगी टीबी की जांच

कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन को लेकर रणनीति और आगे की योजना पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'टीबी एक गंभीर बीमारी है लेकिन इसका इलाज संभव है। समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। बिहार में टीबी उन्मूलन अभियान को अब और तेज किया जाएगा। इस अभियान में राज्यपाल का भी सहयोग मिल रहा है।' राज्यपाल ने टीबी उन्मूलन को लेकर चिंता जताई है और सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

 

अभियान के तहत सभी जिलों में टीबी की स्क्रीनिंग की जाएगी। आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और जीविका दीदियां गांव-गांव जाकर लोगों की जांच करेंगी। जिन लोगों में टीबी के लक्षण पाए जाएंगे उनकी तुरंत जांच कराई जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर उनका मुफ्त इलाज शुरू किया जाएगा। सरकार की ओर से मरीजों को पोषण के लिए भी मदद दी जाएगी ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें।

मरीजों का मुफ्त इलाज होगा

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बिहार में टीबी मरीजों को सरकार की ओर से कई सुविधाएं दी जा रही हैं। टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। इसके अलावा मरीजों को पोषण के लिए हर महीने 1000 रुपये की सहायता राशि भी दी जा रही है। सरकार ने निक्षय पोषण योजना के तहत यह राशि बढ़ाई है। इसके अलावा टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना भी चल रही है। इसमें लोग निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद कर सकते हैं। 

 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी को लेकर लोगों में अभी भी कई तरह की गलतफहमियां हैं। कई लोग इसे छुआछूत की बीमारी समझते हैं और मरीजों से दूरी बना लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। टीबी का इलाज संभव है और समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। अभियान के तहत लोगों को टीबी के लक्षणों और इलाज के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: बंद हो गया विक्रमशिला पुल, अब फेरी के जरिए पार होगी नदी

सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और PHC में टीबी की जांच के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इससे जांच की रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाती है। सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों और डॉक्टरों को भी टीबी मरीजों की जानकारी सरकार को देने का निर्देश दिया है। इससे सभी मरीजों का डाटा एक जगह रहेगा और उनके इलाज पर नजर रखना आसान होगा।

 

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को भी टीबी उन्मूलन अभियान तेज करने का निर्देश दिया है। गांव-गांव में कैंप लगाकर लोगों की जांच की जाएगी। जिन जिलों में टीबी के मरीज ज्यादा हैं वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में टीबी के मरीजों की संख्या में कमी आई है लेकिन अभी भी कई जिलों में मरीजों की संख्या ज्यादा है। ऐसे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

 

लोगों को बताया जाएगा कि टीबी से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि समय पर जांच और इलाज कराना जरूरी है। लोगों को टीबी के लक्षणों और इससे बचाव के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। राज्यपाल ने भी कार्यक्रम में कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद करने की अपील की। जो लोग टीबी मरीजों को गोद लेकर उनकी मदद करना चाहते हैं वे आगे आ सकते हैं। इससे मरीजों को पोषण के साथ मानसिक सहारा भी मिलेगा।