बिहार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 सीनियर IAS अधिकारियों को समन जारी किया है। इनमें दो अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) स्तर के और चार सचिव स्तर के बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित घोटाले और उससे जुड़े पैसों की जांच के लिए की गई है। सभी अधिकारियों को अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। टेंडर घोटाले का मुख्य आरोपी रिशु श्री बताया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय कई महीनों से इस मामले की जांच कर रहा है। अब जांच एजेंसी वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ कर जानकारी जुटाना चाहती है।
प्रवर्तन निदेशालय ने कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों को समन भेजा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार और योगेश कुमार सागर समेत दो अन्य वरिष्ठ IAS अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें दो अधिकारी ACS रैंक के हैं, जबकि चार सचिव स्तर के हैं। सूत्रों का कहना है कि ये सभी अधिकारी उस दौरान अलग-अलग विभागों में तैनात थे, जब टेंडरों में कथित गड़बड़ी हुई थी। ED ने इन अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान आवंटित किए गए टेंडरों और संबंधित फाइलों की जांच की है। इसी आधार पर समन जारी किया गया है।
मुख्य आरोपी रिशु श्री कौन है?
यह मामला बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी विभागों में टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। चुनिंदा ठेकेदारों और कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। टेंडर की शर्तों में हेरफेर कर अपने चहेतों को काम दिया गया। कथित घाटाले का मुख्य आरोपी का नाम भी सामने आ गया है।
इस मामले में रिशु श्री को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। ED ने पहले ही रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजात मिले थे। इन दस्तावेजों में कई अधिकारियों के नाम और हस्ताक्षर वाले नोट भी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि टेंडर घोटाले से हुई कथित अवैध कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। अलग-अलग शेल कंपनियों के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया गया। ED इसी मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
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ED क्या पूछेगी?
प्रवर्तन निदेशालय सभी वरिष्ठ अधिकारियों से कुछ अहम सवाल पूछेगा। इनमें यह जानने की कोशिश की जाएगी कि टेंडर किस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए, उन्हें किस अधिकारी ने मंजूरी दी और टेंडर की शर्तों व नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि टेंडर आवंटन में संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका थी और पैसों के लेन-देन से उनका कोई संबंध था या नहीं।
प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने कहा, 'सभी IAS अधिकारियों को गवाह के तौर पर नहीं, बल्कि पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं, टेंडर किसकी मंजूरी से पास किए गए और क्या किसी तरह का दबाव था। इसके अलावा, अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान उनके और उनके परिवार के वित्तीय लेन-देन की भी जांच हो रही है।'
प्रवर्तन निदेशालय ने बैंकों से कई खातों की जानकारी भी मांगी है। बताया जा रहा है कि ED ने सभी अधिकारियों को अगले सप्ताह पटना स्थित अपने जोनल कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है। अधिकारियों को टेंडर से जुड़ी फाइलें और अपने आय-व्यय से संबंधित दस्तावेज भी साथ लाने को कहा गया है।
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'जांच अभी प्रारंभिक चरण में'
ED की ओर से 6 सीनियर IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने के बाद बिहार के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। सचिवालय में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई अधिकारी इसे सामान्य जांच प्रक्रिया बता रहे हैं, तो कुछ इसे बड़ी कार्रवाई की शुरुआत मान रहे हैं। बिहार में इससे पहले भी कई IAS अधिकारियों के खिलाफ ED और CBI की कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि, एक साथ 6 वरिष्ठ अधिकारियों को समन भेजा जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, ED का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। पूछताछ के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
