हिमाचल प्रदेश से लद्दाख तक रेल कनेक्टिविटी का सपना अब बड़ी परियोजना का रूप ले चुका है। प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन हिमालय के दुर्गम इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। करीब 489 किलोमीटर लंबी इस रेललाइन की अनुमानित लागत करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये है। इसके बनने से हिमाचल और लद्दाख के बीच यात्रा आसान होने के साथ-साथ पर्यटन, कारोबार और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित रेलमार्ग बिलासपुर के बेरी से शुरू होकर सुंदरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सू, दारचा और केलांग होते हुए लद्दाख की ओर जाएगा। इसके बाद रेललाइन सरचू, पांग, रुमत्से, उप्शी और खारू से होते हुए लेह तक पहुंचेगी। इस रेल परियोजना की सबसे खास बात इसकी ऊंचाई है। प्रस्तावित मार्ग में टैगलग ला क्षेत्र में करीब 5,367 मीटर की ऊंचाई पर रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। इसके बनने के बाद यह दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशनों में शामिल हो सकता है।
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सुरंगों से आसान होगी कनेक्टिविटी
हिमालय के बेहद कठिन भौगोलिक क्षेत्र से गुजरने वाली इस रेललाइन में बड़ी संख्या में सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना में करीब 270 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरने की बात सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह परियोजना इंजीनियरिंग के लिहाज से कितनी चुनौतीपूर्ण होगी।
बिलासपुर-लेह रेललाइन को सिर्फ यात्री और पर्यटन परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका रणनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा है। रेल संपर्क बनने से लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना, उपकरण और जरूरी सामान पहुंचाना आसान होने की उम्मीद है।
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पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
रेललाइन बनने के बाद हिमाचल के मंडी, मनाली और लाहौल के साथ-साथ लद्दाख के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। फिलहाल इन इलाकों की कनेक्टिविटी काफी हद तक सड़क मार्ग पर निर्भर है। रेल संपर्क बनने से पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यानी बिलासपुर-लेह रेललाइन सिर्फ एक रेल परियोजना नहीं बल्कि हिमाचल से लद्दाख तक कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना साबित हो सकती है।
