राजस्थान के जयपुर में एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहां एक पीजी कॉलेज के पैरामेडिकल विभाग में एग्जाम हो रहा था। आरोपियों ने कम से कम 40 से 45 छात्रों को नकल कराने में मदद की थी। पुलिस की सतर्कता की वजह से जल्द ही नकल कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश हो गया। इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने नकल कराने के लिए 5.50 लाख रुपये लिए थे। एग्जाम में नकल का खुलासा होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई।

 

यह मामला जयपुर के प्रमादेवी मेमोरियल पीजी कॉलेज एग्जाम सेंटर का है, जहां एग्जाम से पहले नकल कराने की रणनीतिक तैयारियां की गई थीं। जब खोरा बीसल थाना के पुलिस को इस नकल की भनक लगी तो वह तुरंत कॉलेज पहुंची और नकल का भंडाफोड़ किया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, नकल कराने वाले लोगों में कॉलेज के संचालक देवकृष्ण मंडीवाल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

 

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पुलिस ने जब्त किया नकल का सामान

+पुलिस ने इस मामले में कॉलेज के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल, देवकृष्ण मंडीवाल और दो अन्य लोग शामिल हैं। जांच के दौरान पुलिस को कुछ पर्चियां मिलीं, जिनमें नकल करने वाले छात्रों के बारे में लिखा गया था। इन पर्चियों को पुलिस अधिकारियों ने जब्त कर लिया, जिन्हें नकल के पुख्ता सबूत माना जा सकता है। इसके अलावा पुलिस आगे की जांच कर रही है, ताकि पता चल सके कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल थे।


पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि एग्जाम की व्यवस्था सही नहीं थी। छात्रों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे कई छात्र बेहद नाखुश थे।

 

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पेपर बनाते वक्त हुई लापरवाही

इस मामले की जांच-पड़ताल में पुलिस को पता चला कि क्वेश्चन पेपर प्रिंट कराते वक्त लापरवाही बरती गई। जहां पेपर प्रिंट हो रहा था, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था, जो कि बहुत बड़ी लापरवाही मानी गई। इसी वजह से राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने परीक्षा रद्द कर दी। एग्जाम में नकल होने के कारण परीक्षा रद्द होने से कई छात्र नाराज हैं।