भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में बीटेक के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत ने देश का माहौल गरमाया दिया है। इस बीच मृतक के पिता रवींद्र वाकोडे ने चेतावनी दी है कि अगर घटना के जिम्मेदार लोगों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह 23 सितंबर यानी बुधवार को भूख हड़ताल पर बैठेंगे। यह फैसला उन्होंने मुंबई पुलिस से मिलने के बाद लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कैंपस में 10 सदस्यों की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है।
इसके साथ ही जिस प्रोफेसर पर आरोप लगा है, उन्हें जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने को कह दिया गया है। इस समिति को एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
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जांच समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
कमेटी की अगुवाई IIT पलक्कड़ के चेयरमैन प्रोफेसर रमेश वेंकटेश्वरन कर रहे हैं। इस टीम में अलग-अलग विभागों के प्रोफेसर, एक पूर्व आईएएस अधिकारी, एक साइकोलॉजिस्ट और तीन छात्र नेता को भी शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। आपको बता दें कि पिता ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच से मुलाकात कर मांग की है कि एफआईआर में दर्ज IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
छात्रों की क्या मांग?
कैंपस में एनर्जी साइंस डिपार्टमेंट के स्टूडेंट ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर इंसाफ की मांग की। कैंपस में स्टूडेंट्स के तीन दिनों तक चले बड़े प्रदर्शनों के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों ने डायरेक्टर को 18 मांगों का एक पत्र दिया था जिसको स्वीकार कर लिया गया है। इन मांगों में प्रोफेसरों के लिए मेंटल हेल्थ वर्कशॉप और एकडमिक समितियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना शामिल है। IIT बोर्ड ने छात्रों की ज्यादातर मांगों को मान लिया है। हालांकि अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पर अभी सहमति नहीं बनी है।
अब तक क्या हुआ?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ SC/ST एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज है। IIT बॉम्बे प्रशासन ने भारी विरोध के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण को डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
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घटना के बाद परीक्षा के दौरान सुरक्षा और चेकिंग पर भी सवाल उठे हैं। सभी का सवाल यह है कि चेंकिंग के बावजूद फोन अंदर कैसे पहुंचा। वहीं छात्रों का कहना है कि गेट पर चेकिंग बहुत सख्त नहीं होती हैं। कई बार लोग आसानी से फोन अंदर लेकर चले जातें हैं।
