मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के विवादित एक सरकारी इमामबाड़े को लेकर बड़ा फैसला सुनाया, जिसके तहत इमामबाड़े की चाबी मुस्लिम समुदाय को सौंपी जाएगी, ताकि वे लोग मोहर्रम के दिन इमामबाड़े का इस्तेमाल कर सकें। कोर्ट के इस फैसले के बाद इमामबाड़े के आसपास और पूरे शहर में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि शहर में शांति बनी रहे और किसी प्रकार अशांति और अफवाह न फैले।


हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक, 5 दिनों के लिए इमामबाड़े की चाबी मुस्लिम पक्ष को सौंपी जाएगी। इसके तहत 1 जुलाई को सब डिविजनल ऑफिसर (SDO) मुस्लिम पक्ष को चाबी सौंपेंगे। कोर्ट के जज ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता सिद्दीक को धार किले में स्थित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां दी जाएं। जानकारी के लिए बता दें कि इमामबाड़ा एक ऐसी जगह है, जहां लोग सामूहिक रूप से मोहर्रम का शोक मनाते हैं।

 

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क्यों लगाया गया था इमामबाड़े में ताला?

मध्य प्रदेश प्रशासन ने 2025 में इमामबाड़े पर ताला लगा दिया था क्योंकि सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे पीडब्ल्यूडी (PWD) की संपत्ति घोषित किया था। इसके बाद इमामबाड़े में ताला लगा दिया गया। इसके बाद सिद्दीक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार ने मोहर्रम के लिए इमामबाड़ा खोलने का आदेश दिया।


इसके अलावा कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई थी, जिसमें हर साल मोहर्रम के दौरान इमामबाड़े में ताजिया बनाने की अनुमति मांगी गई थी। उस याचिका में 70 दिनों तक ताजिया निर्माण कार्य की इजाजत मांगी गई थी। कोर्ट में वकीलों ने दलील दी कि धार के सरकारी इमामबाड़े में आजादी से पहले से ही ताजिया बनाने की परंपरा रही है। हालांकि, हाई कोर्ट ने ताजिया निर्माण के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराई है।

 

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इमामबाड़े में नहीं बनेंगे ताजिया

जज ने साफ तौर पर कहा कि कोई भी व्यक्ति इमामबाड़े में निर्माण कार्य नहीं करेगा। साथ ही इमामबाड़े की साफ-सफाई की जिम्मेदारी सिद्दीक की होगी। इसके अलावा इमामबाड़े की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।


मोहर्रम पर्व के दौरान पूरे शहर में कई ताजिए निकाले जाएंगे। गुरुवार रात से ही ताजिए निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई। शहर की मुस्लिम बस्तियों से छोटी और बड़ी मिलाकर करीब 130 ताजिए निकाले जाएंगे।