कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और फसलों के खराब होने से आने वाले दिनों में पेयजल और बिजली की कमी का खतरा बढ़ सकता है। कई इलाकों में सूखे के कारण फसलों की बुवाई तक नहीं हो सकी है।

 

CM शिवकुमार ने अपने गृहनगर कनकपुरा में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राज्य के 100 तालुकों में पहले ही सूखा घोषित किया जा चुका है। तय मानदंडों के आधार पर अन्य क्षेत्रों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया जारी है। सरकार बिजली की मांग पूरी करने के लिए ताप विद्युत उत्पादन बढ़ाने और राष्ट्रीय ग्रिड से अतिरिक्त बिजली लेने के विकल्पों पर विचार कर रही है।

 

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19 हजार मेगावाट पार हुई बिजली की मांग

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले सप्ताह कर्नाटक में बिजली की मांग 19,000 मेगावाट से अधिक पहुंच गई थी। शाम के व्यस्त समय में मांग पूरी करने के लिए सरकार को 11 से 13 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी। उन्होंने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज से इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने और पड़ोसी राज्यों से बिजली की उपलब्धता को लेकर बातचीत करने को कहा है। शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में निवेशकों की ओर से पानी, बिजली और जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है।

 

सरकार ताप विद्युत उत्पादन बढ़ाने के साथ कोयला उत्पादक क्षेत्रों से बिजली लेने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड' व्यवस्था के तहत देश के दूसरे हिस्सों से भी बिजली कर्नाटक लाई जा सकती है। इसके लिए ट्रांसमिशन चार्ज देना होगा।

 

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विधानसभा के विशेष सत्र में किसानों पर चर्चा

सूखे से किसानों को हुए नुकसान और उनकी परेशानियों पर चर्चा के लिए 21 से 23 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें दो दिन सूखे के मुद्दे पर चर्चा के लिए रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग दलों के विधायक अपने-अपने इलाकों की समस्याएं सदन में उठा सकेंगे। उन्होंने साफ कहा कि सूखे के मुद्दे पर कोई दलगत राजनीति नहीं होगी। जिन इलाकों में सूखे की स्थिति गंभीर है और वे तय मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें जल्द ही सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा।

18 सितंबर को दक्षिण कन्नड़ में कैबिनेट बैठक

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक 18 सितंबर को तटीय जिले दक्षिण कन्नड़ में होगी। बैठक में पलायन रोकने और क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल कर लोगों की स्थिति सुधारने पर चर्चा होगी। इस दौरान कई कार्यक्रमों और नई पहलों की घोषणा की जाएगी।