उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि जिस अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगी थी, उसके लिए बिजली कनेक्शन हासिल करने में फर्जी एनओसी का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि भवन स्वामी ने मिलीभगत कर विद्युत सुरक्षा निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर एनओसी तैयार कराई और उसी के जरिए बिजली कनेक्शन ले लिया। अब इस पूरे मामले ने बिजली विभाग और विद्युत सुरक्षा निदेशालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

जांच में सामने आया है कि कॉम्प्लेक्स के लिए जारी एनओसी का रिकॉर्ड विभागीय अभिलेखों में नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, जिस क्रमांक पर एनओसी जारी होने का दावा किया गया, उसी क्रमांक पर किसी अन्य उपभोक्ता का विवरण दर्ज है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि दस्तावेजों में हेरफेर कर कनेक्शन हासिल किया गया। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2016 के बाद से इस तरह के मामलों की गहन जांच नहीं की गई, जिसके चलते फर्जीवाड़े का यह खेल लंबे समय तक चलता रहा।

 

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विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया है कि एनओसी पर तत्कालीन सहायक निदेशक के नाम से किए गए हस्ताक्षर संदिग्ध हैं। विभागीय रिकॉर्ड में संबंधित एनओसी का कोई उल्लेख नहीं मिला है। निदेशालय ने पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी गई है।

स्थायी कनेक्शन देकर नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां

सूत्रों के मुताबिक, जिस भवन का निर्माण पूरी तरह वैध नहीं था, उसे अस्थायी के बजाय स्थायी बिजली कनेक्शन जारी कर दिया गया। नियमों के अनुसार, भवन निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही स्थायी कनेक्शन दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में नियमों को दरकिनार कर यह कनेक्शन जारी किया गया।

शहर में हजारों कनेक्शनों की जांच की जरूरत

लखनऊ में 10 किलोवाट से अधिक भार वाले हजारों व्यावसायिक बिजली कनेक्शन संचालित हैं। अग्निकांड के बाद अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं अन्य भवनों में भी इसी तरह फर्जी एनओसी के आधार पर कनेक्शन तो नहीं लिए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यापक स्तर पर जांच कराई जाए तो कई और मामले सामने आ सकते हैं।

 

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अग्निकांड ने खोली सिस्टम की पोल

अलीगंज का अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी निगरानी और विभागीय जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिजली कनेक्शन लेने वालों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारी और कर्मचारी कौन थे। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली लापरवाही और भ्रष्टाचार की परतें खोल सकता है।