हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी को सौंपने के फैसले पर हरियाणा में बिजली निगम कर्मियों विरोध शुरू कर दिया है। बुधवार को हरियाणा में बिजली निगम कर्मियों ने बिजली निगम कार्यालयों में सुबह 11 से दोपहर करीब एक बजे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मियों ने फैसले की प्रतिलिपियां जलाई। हरियाणा में बिजली निगम कर्मचारी बुधवार रात रात 10 बजे से 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर रहेंगे।
मामले को देखते हुए सरकार ने बुधवार दोपहर बिजली निगम के 25 अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें तत्काल कार्यस्थल पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, ऊर्जा मंत्री अनिल विज की ओर से बुधवार दोपहर 3 बजे बातचीत के लिए बुलाए जाने पर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के साझा मंच 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा' ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। मोर्चे ने HVPNL के चीफ इंजीनियर को पत्र भेजकर असमर्थता जताई। संगठन के अनुसार, वार्ता के लिए शॉर्ट नोटिस दिया गया। साथ ही, कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं और अन्य पहले से तय व्यस्तताओं के चलते बैठक में शामिल नहीं हो सकते।
यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा को मिलेगा हरियाणा गौरव अवॉर्ड
'अपील के लिए है 45 दिन का समय'
मुख्यमंत्री आवास पर बिजली मंत्री अनिल विज के साथ बिजली निगम के एमडी विक्रम यादव, IAS आशिमा बराड़ की बैठक हुई। मंत्री विज ने कहा कि HERC के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 45 दिन का समय है लेकिन सरकार 5-6 दिन में ही अपील करेगी और आदेश पर स्टे लेगी। कर्मचारी नेताओं की ओर से सुझाए गए वकील को भी सरकार साथ लेगी। जब दोनों पक्ष मिलकर बातचीत कर रहे हैं, तो इस लड़ाई को भी मिलकर लड़ेंगे। इस दौरान विज ने कहा कि वह स्वयं बिजली निजीकरण के खिलाफ हैं और इसीलिए उनके विभाग ने ऌएफउ के आगे पूरी दृढ़ता से इसका विरोध किया था, जोकि लिखित में है और इससे संबंधित दस्तावेज कोई भी हासिल कर सकता है कि हमने क्या कहा था। उन्होंने कहा कि ऌएफउ ने फैसला दे दिया है और उसकी अपील करेंगे, हम आखिरी सिरे तक पूरी तरह से जाएंगे।
यह भी पढ़ें: पुलिस की कस्टडी से भागे आरोपी, पुलिया से लगाई छलांग, अस्पताल पहुंचे
'समझौते का हुआ उल्लंघन'
सर्कल सचिव आॅपरेशन अंबाला सतबीर देशवाल ने बताया कि संयुक्त संघर्ष मोर्चे ने जनता की परेशानी को देखते हुए अपनी तरफ से हड़ताल को टालने का हर संभव प्रयास किया। बातचीत के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकालने की पहल की। इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने 10 अगस्त को निगम मैनेजमेंट के साथ यूनियन के लिखित समझौते का उल्लंघन किया। 11 पावर कंपनी को गुड़गांव और नूह में पैरेलल लाइसेंस दे दिया, जो बैक डोर से बिजली विभाग का निजीकरण करने की पहल है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने हड़ताल का ऐलान किया। यूनियन पदाधिकारी राजेश चंद्र सिरोही, तिलक सिंह, रामलाल, मुकेश शर्मा, रवि कुमार, प्रेम पाल, दीपक, प्रदीप, राजकुमार सेहला ने सभी कर्मचारियों से हड़ताल पर जाने के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद संयुक्त संघर्ष मोर्चा की 24 अक्टूबर को अहम बैठक होगी। जिसमें आगामी रणनीति का फैसला लिया जाएगा।
