दिल्ली सरकार ने NEET -UG परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐलान किया है कि आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अब कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें यह राहत नहीं मिलेगी। दिल्ली पुलिस का दावा है कि ऐसे 989 लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है।
यह फैसला 20 जुलाई को CJP के चोल संसद मार्च के दौरान दर्ज मामलों को लेकर लिया गया है। उस दिन जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद पुलिस ने कई FIR दर्ज की थीं। अब दिल्ली सरकार ने इन मामलों को बंद करने का फैसला लिया है लेकिन आपराधिक बैकग्राउंड वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
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13 मामलों में नहीं होगी आगे की कार्रवाई
दिल्ली सरकार के गृह विभाग के अनुसार, NEET आंदोलन से जुड़े कुल 13 मामले दर्ज किए गए थे। सरकार ने साफ किया है कि इन मामलों में शामिल आम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। जिन लोगों को पहले गिरफ्तार किया गया था या हिरासत में लिया गया था उन्हें भी जल्द रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले को उपराज्यपाल की भी मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह राहत सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक लिया गया है।
989 प्रदर्शनकारियों पर क्यों जारी रहेगी कार्रवाई?
मीडिया रिपोर्ट में छापे दिल्ली पुलिस के मुताबिक, चलो संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद CCTV फुटेज के आदार पर 2,873 लोगों की पहचान की गई थी। इनमें से 989 लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। पुलिस का कहना है कि इनमें हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, योन अपराध, आर्म्स एक्ट और NDPS कानून जैसे गंभीर मामलों में आरोपी या पहले से दर्ज अपराधी शामिल हैं। इसी वजह से इन लोगों को सरकार की राहत का लाभ नहीं मिलेगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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CJP ने फैसले पर जताई आपत्ति
इस फैसले पर CJP ने कड़ी नाराजगी जताई है। पार्टी का कहना है कि क्रेंद्र सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के दौरान सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का आश्वासन दिया था। अब आपराधिक रिकॉर्ड का आधार बनाकर कुछ लोगों को राहत से बाहर रखना वादाखिलाफी है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सभी FIR वापस नहीं ली गईं और हिरासत में लिए गए छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। वहीं, सरकार का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
