संजय सिंह, पटना। बिहार में अपराध अब सिर्फ हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की नकली चमक के सहारे भी किए जा रहे हैं। कहीं फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर डीएम कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश हो रही हैं, तो कहीं अपराधी खुद को आर्थिक अपराध इकाई का अधिकारी बताकर सरेआम लूट की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला सारण जिले का है, जहां नकली जांच दल बनकर आए बदमाशों ने ज्वेलर्स कारोबारियों को घंटों बंधक बनाकर करीब साढ़े दस लाख रुपये की संपत्ति लूट ली।

 

जानकारी के मुताबिक मढ़ौरा सोनापट्टी निवासी ज्वेलर्स कारोबारी कुंदन कुमार, संदीप कुमार और आनंद कुमार पटना से आभूषण खरीदकर स्विफ्ट कार से लौट रहे थे। उनके साथ चालक अफरोज भी मौजूद था। दरियापुर थाना क्षेत्र पार करते ही बिहार सरकार लिखी और हूटर लगी एक संदिग्ध इनोवा ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रोक लिया। इनोवा से उतरे छह नकाबपोश बदमाशों ने खुद को ईओयू अधिकारी बताते हुए जांच की बात कही। सरकारी रौब और खाकी के दबाव में कारोबारी कुछ समझ पाते, उससे पहले अपराधियों ने पूरी स्थिति पर कब्जा जमा लिया।

 

यह भी पढ़ें: 'राष्ट्रीय पशु' बने गाय, बकरीद से पहले मुस्लिम संगठनों ने तेज की मांग

कारोबारियों को बंधक बनाकर घंटों घुमाते रहे अपराधी

बदमाशों ने पहले चालक को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद दो कारोबारियों को इनोवा में बैठा लिया गया, जबकि बाकी अपराधी उनकी स्विफ्ट कार खुद चलाने लगे। इसके बाद शुरू हुआ हाईवे पर चलता-फिरता फर्जी ऑपरेशन। सूत्रों के अनुसार दोनों गाड़ियां दरियापुर से परसा, सोनहो और छपरा रोड की ओर बढ़ीं। टोल प्लाजा के पास पहुंचते ही अपराधियों ने रास्ता बदल दिया ताकि किसी को शक न हो। फिर अमनौर, मढ़ौरा, पटेढ़ा, खैरा और नगरा इलाके में करीब दो घंटे तक गाड़ियां घूमती रहीं। 

 

इस दौरान हथियारों के बल पर कारोबारियों से पूछताछ, धमकी और मारपीट की गई। बदमाशों ने सोना-चांदी के जेवरात, नकदी, छह मोबाइल फोन, चेन, अंगूठी और वाहन की चाबी समेत करीब 10.5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति लूट ली।

 

यह भी पढ़ें: 'सुशासन नहीं, डर का शासन', CM सम्राट चौधरी के बयान पर रोहिणी का तंज

वारदात के बाद इलाके में हड़कंप

घटना के बाद किसी तरह पीड़ितों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि अपराधियों ने सरकारी पहचान, हूटर और कथित जांच एजेंसी के नाम का इस्तेमाल कर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

अपराधियों तक कैसे पहुंच रही सरकारी पहचान?

इस घटना ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर अपराधी इतनी आसानी से बिहार सरकार लिखी गाड़ी, हूटर और जांच एजेंसी की पहचान का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं? अगर आम लोग असली और नकली अफसर में फर्क ही नहीं कर पाएंगे, तो ऐसे गिरोहों का आतंक और बढ़ सकता है। सारण की यह वारदात सिर्फ लूट नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सीधा हमला मानी जा रही है।