तेलंगाना में डायबिटीज मरीजों को इंसुलिन बंद करने की सलाह देने वाले एक अस्पताल के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। रायदुर्गम पुलिस ने एक मरीज की शिकायत पर यह कदम उठाया। मरीज का कहना है कि इंसुलिन बंद करने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। जबकि उसने अस्पताल से 26000 रुपये में डाइट और सप्लीमेंट्स खरीदे थे। पुलिस ने वीरमचिनेनी रामकृष्ण (VRK) और डॉ. कोटेश्वर राव व अन्य के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है।
साइबराबाद पुलिस के मुताबिक रायदुर्गम पुलिस थाना क्षेत्र के शेखपेट इलाके में वीआरके हेल्थ केयर सेंटर है। कल्लेडा साई कृष्णा (30) ने अस्पताल के खिलाफ शिकायत दी। उनका कहना है कि वे टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। वीआरके हेल्थ सेंटर ने उन्हें 'वीआरके डाइट' लेने की सलाह दी और दावा किया कि इससे टाइप-1 डायबिटीज ठीक हो जाएगा। इंसुलिन लेना भी बंद करना होगा।
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14 सितंबर को बिगड़ी मरीज की तबीयत
मरीज का आरोप है कि जब उसने इंसुलिन लेना बंद किया तो उसकी तबीयत बिगड़ गई। 14 सितंबर को उसे सिकंदराबाद के किम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में उन्हें यहां डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) होने का पता चला। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने डाइट से जुड़ी सर्विस और सप्लीमेंट्स लिया और लगभग 26,000 रुपये का भुगतान भी किया।
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
शिकायत के आधार पर पुलिस ने हेल्थ सेंटर से जुड़े वीरमचिनेनी रामकृष्ण (VRK) और डॉ. कोटेश्वर राव व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
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लाइसेंस और डॉक्टरों की योग्यता जांची जा रही
पुलिस हेल्थ सेंटर के लाइसेंस और कानूनी मंजूरी की जांच कर रही है। सेंटर के सप्लीमेंट्स की जांच, विज्ञापन और वित्तीय लेनदेन भी जांच के केंद्र में है। अस्पताल से जुड़े लोगों की भूमिका और योग्यता की भी जांच होगी। पुलिस पीड़ित व्यक्ति के मेडिकल रिपोर्ट को सरकारी मेडिकल विशेषज्ञों के पास भेजेगी, ताकि यह पता लगाया जा के कि क्या कोई लापरवाही हुई है।
