गोवा विधानसभा ने मंगलवार को एक ऐसा विधेयक पास किया है जिससे जेल में मोबाइल रखने वालों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। इस विधेयक के कानून बन जाने की पूरी संभावना है और ऐसा होने पर जेल में मोबाइल इस्तेमाल करने वालों को 3 साल की सजा हो जाएगी। इसके अलावा, 25 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया। इसका उद्देश्य मौजूदा जेल कानून की जगह एक व्यापक कानून लागू करना है, जिसमें जेलों में प्रतिबंधित सामान, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और जेल के भीतर से संचालित संगठित आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कड़े प्रावधान शामिल हैं।
विधानसभा ने 'गोवा कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक, 2026' को ध्वनि मत से पारित किया। इसके तहत जेल के अंदर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना या उनका इस्तेमाल करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
सजा पर सजा का प्रावधान
विधेयक के अनुसार, इस अपराध के लिए दी गई सजा उस सजा की अवधि पूरी होने के बाद शुरू होगी, जिसे कैदी पहले से भुगत रहा है। साथ ही, संवेदनशील बैरकों और कोठरियों में तैनात जेल कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला किया जाएगा, ताकि कैदियों और कर्मचारियों के बीच किसी तरह का गठजोड़ न बने और कामकाज में लापरवाही की स्थिति पैदा न हो।
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विधेयक में यह भी प्रावधान है कि गंभीर जोखिम वाले, कुख्यात या आदतन अपराधियों की सजा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की सूचना संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी। इसी तरह जमानत पर रिहा किए गए विचाराधीन कैदियों तथा पैरोल या फरलो पर बाहर भेजे गए कैदियों की जानकारी भी संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी, ताकि उनकी निगरानी की जा सके।
केंद्रीय मॉडल कानून पर आधारित
यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदर्श कारागार एवं सुधारात्मक सेवा कानून, 2023 के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जेलों से जुड़े अलग-अलग मौजूदा कानूनों को एक व्यापक कानून के तहत लाना है। इसमें कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए नए प्रावधान किए गए हैं तथा जेल में रहते हुए उनके बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
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विधानसभा ने इसी सत्र में 'गोवा अधिवक्ता सुरक्षा विधेयक, 2026' भी पारित किया, जिसके तहत वकीलों पर हमला करने पर सात साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। धमकियों का सामना कर रहे वकीलों को पुलिस सुरक्षा देने का प्रावधान भी इसमें किया गया है। कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए वकीलों के खिलाफ झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान भी इस विधेयक में है।
