बिहार के 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुलपति (Vice Chancellor) और प्रतिकुलपति (Pro Vice Chancellor) की नियुक्ति के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्यपाल सचिवालय ने कुलपति बनने के लिए पहले रखी गई 10 साल के अनुभव की अनिवार्य शर्त हटा दी है। इसके साथ ही आवेदन की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी गई है।
राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के निर्देश पर अतिरिक्त सचिव संजय कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। अब इच्छुक अभ्यर्थी 28 जुलाई 2026 की रात 11:59 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। नए नियम लागू होने से अधिक संख्या में योग्य शिक्षक आवेदन कर सकेंगे।
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क्या बदला नया नियम?
पहले जारी विज्ञापन में कहा गया था कि कुलपति पद के लिए प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव होना जरूरी है। इस शर्त के कारण कई योग्य प्रोफेसर आवेदन नहीं कर पा रहे थे। अब यह शर्त हटा दी गई है। नए आदेश के अनुसार कुलपति पद के लिए पात्रता यूजीसी रेगुलेशन-2018 के क्लॉज 6.3 (VI) के आधार पर तय होगी। यानी अब पात्रता का निर्धारण UGC यूजीसी के नियमों के अनुसार किया जाएगा और 10 साल के अनुभव की अनिवार्य शर्त लागू नहीं रहेगी।
किन 10 विश्वविद्यालयों में लागू होंगे नए नियम?
यह संशोधित नियम बिहार के इन 10 विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति की नियुक्ति पर लागू होगा:
- आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा
- कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
- भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा
- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर
- जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा
- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा
- मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, पटना
- तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय
- मगध विश्वविद्यालय, बोधगया
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28 जुलाई तक कर सकेंगे आवेदन
नियम में बदलाव के साथ-साथ राज्यपाल सचिवालय ने आवेदन की तारीख भी बढ़ा दी है। पहले आवेदन की आखिरी तारीख जुलाई के दूसरे सप्ताह में थी। अब इसे बढ़ाकर 28 जुलाई 2026, रात 11:59 बजे कर दिया गया है। जिन अभ्यर्थियों ने अब तक आवेदन नहीं किया था, उनके पास अब 16 दिन का अतिरिक्त समय है। वे नए नियम के अनुसार अपनी योग्यता जांच कर आवेदन कर सकते हैं।
राज्यपाल सचिवालय ने साफ किया है कि पात्रता और तारीख में हुए इस बदलाव के अलावा पहले जारी विज्ञापनों की बाकी सभी शर्तें और नियम जस के तस रहेंगे। नियम में बदलाव के बाद विवि के शिक्षकों में खुशी है। कई प्रोफेसरों का कहना है कि 10 साल वाली शर्त की वजह से वे आवेदन नहीं कर पा रहे थे। अब UGC के नियम से पात्रता तय होने से ज्यादा से ज्यादा योग्य लोग इस दौड़ में शामिल हो सकेंगे।
