गुजरात के गांधीनगर जिले की कलोल सेशंस कोर्ट ने गोहत्या मामले में 3 दोषियों को उम्रकैद और 2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला अगस्त 2024 के एक गोहत्या केस से जुड़ा है, जिसमें 277 किलोग्राम गोमांस (बीफ) जब्त किया गया था। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आदेश में वेदों, ऋग्वेद और मनुस्मृति का हवाला दिया है। इस मामले में कोर्ट ने 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 1954' के तहत एक अन्य अपराध के लिए उन्हें 10 साल की जेल और 1 लाख रुपये प्रति व्यक्ति जुर्माने की सजा सुनाई है। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
कोर्ट ने कहा कि गाय का धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से खास महत्व है। इसके अलावा, कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर ऐसे अपराधों पर सख्ती नहीं की गई, तो भविष्य में गौमाता विलुप्त हो जाएंगी। न्यायाधीश ने पशुओं की रक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी पर भी बात की, हिंदू धार्मिक ग्रंथों में गाय को दिए गए महत्व का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि वह गाय के महत्व को देखते हुए इस मामले का फैसला कर रही है।
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फैसले में मनुस्मृति और वेदों का जिक्र
कोर्ट के गुजराती भाषा में लिखे गए अपने 76 पन्नों के फैसले में हिंदू धर्मग्रंथों, जिनमें मनुस्मृति और वेद शामिल हैं का हवाला देते हुए गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का जिक्र किया गया है। अदालत ने कहा कि मनुस्मृति में गाय (गोधन) को केवल एक पशु नहीं, बल्कि समाज और धर्म का एक स्तंभ माना गया है। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए वह इस मामले में फैसला सुना रही है।
न्यायाधीश ने पशुओं की रक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी का भी जिक्र किया और हिंदू धार्मिक ग्रंथों में गाय को दिए गए महत्व पर भी जोर डाला है। इसके अलावा, ऋग्वेद का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि गाय को अघन्या (जिसे मारा न जाए) कहा गया है। फैसले में एक संस्कृत श्लोक भी शामिल किया गया है।
त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्। त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे॥
इसका अर्थ है: 'आप सभी देवताओं की माता हैं, और आप ही सभी पवित्र यज्ञों का स्रोत और कारण हैं। आप सभी पवित्र जल-स्रोतों और तीर्थस्थलों में सबसे पवित्र हैं। हे सदा पवित्र, निर्दोष और मंगलमयी गौ माता, मैं आपको नमन करता हूं।'
क्या है पूरा मामला?
22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के कलोल में एक घर में इन तीनों दोषियों वसीम, मोहम्मद रफीक और अशफाक उर्फ सलमान ने पैसों के लिए गायों को काटा था। वे मांस को जमा करने और बेचने में भी शामिल थे। आरोप था कि तीनों ने मिलकर यह काम किया। मौके से करीब 277 किलो गोमांस बरामद किया गया था। इसके अलावा, वहां से चाकू, कुल्हाड़ी, वजन करने की मशीन, रस्सियां और वाहन भी जब्त किए गए थे। इन सभी सामानों की कुल कीमत 3,61,540 रुपये आंकी गई थी।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि तीनों आरोपियों ने इस अपराध में एक-दूसरे का साथ दिया और मांस को बेचने के इरादे से अपने पास रखा था। हालांकि तीनों आरोपियों ने अपनी सफाई में कहा कि पुलिस ने शिकायत तब दर्ज कर ली थी, जब फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट से यह पुष्टि नहीं हुई थी कि बरामद मांस गोमांस ही है।
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सजा नहीं मिली तो गौ माता विलुप्त हो जाएंगी: कोर्ट
अदालत ने कहा कि गायों के साथ जिस तरह की क्रूरता की गई, उसे देखते हुए तीनों को कानून के मुताबिक सजा देना जरूरी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर ऐसे अपराधों पर सख्ती नहीं की गई, तो समय के साथ 'गौ माता' विलुप्त हो जाएंगी। कोर्ट ने कहा कि तीनों ने गायों के मुंह, पेट, पैर और खाल तक काट दिए थे और उनसे 277 किलो मांस निकालकर बेचने की तैयारी कर रहे थे। तीनों के वकील ने सजा में छूट यानी प्रोबेशन देने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
इस मामले में कोर्ट ने दो अन्य आरोपियों, गुलाम मोइन मुस्ताक अहमद कुरैशी और विट्ठल उर्फ भूपत सेनमा को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। खास तौर पर, मामले में उनके खिलाफ गवाही देने वाले लोग नहीं थे। इसलिए उन्हें संदेह का लाभ दिया गया।
