भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती योजना को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब हिमाचल प्रदेश के पूर्व सैनिकों ने भी इस योजना को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेना में भर्ती की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है और अग्निवीर भर्ती को बंद करने पर विचार किया जाना चाहिए।

 

पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग की है कि सेना में जवानों की भर्ती के लिए पहले की तरह स्थायी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उनका मानना है कि सेना में लंबे समय तक सेवा देने वाले जवानों के लिए ना तो पेंशन की सुविधा है और न ही अन्य सुविधाएं हैं।

अग्निवीर भर्ती को बंद करने का मुद्दा

भूतपूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड की बैठक आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई। जिसमें पूर्व सैनिकों ने अग्निपथ यानी अग्निवीर भर्ती को बंद करने का मुद्दा उठाया और मुख्यमंत्री से मामले को केन्द्र सरकार के साथ उठाने की मांग की है। कुल्लू के पूर्व सैनिक शिवदयाल सिंह ने कहा कि इस अग्निवीर योजना से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है क्योंकि चार साल के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। इसके बाद न पेंशन की सुविधा मिलती है और न ही नियमित सैनिकों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं। 

 

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प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे CM

मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निपथ योजना के मामले पर वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे और राज्य के पूर्व सैनिकों की भावनाओं को केन्द्र सरकार तक पहुंचाएंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निपथ योजना से सबसे ज्यादा नुकसान हिमाचल को हुआ है। इसका असर कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर जैसे सैनिक बहुल जिलों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। सेना में भर्ती कोटे को भी कम किए जानें की वजह से भी हिमाचल प्रदेश के युवा निराश हैं। उन्होंने कहा कि चार परमवीर चक्र जीतने वाले हिमाचल प्रदेश तथा देश के वीर जवानों के साथ अग्निपथ योजना अन्याय है। उन्होंने कहा कि चार परमवीर चक्र विजेताओं की धरती हिमाचल और देश के वीर जवानों के साथ अग्निपथ योजना अन्याय है। 

पुलिस कॉन्स्टेबल के 1000 और पद भरेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस में 1300 पदों पर पुलिस कांस्टेबल की भर्ती की है और आने वाले समय में एक हजार और पद भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती के उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है और दूध के दाम में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की है। 

 

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सैनिक कल्याण मंत्री ने क्या कहा?

सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल ने कहा कि हिमाचल सैनिक बहुल राज्य है और पूर्व सैनिक राज्य की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं। इसी कारण कई ऐतिहासिक कदम इस दिशा में उठाए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता पूर्व सैनिकों को योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है। इस बैठक में सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए है। बैठक में भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम के चेयरमैन कर्नल मनीष कुमार, मुख्य सचिव केके पंत, सचिव आशीष सिंहमार, प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।