हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह की बेटी और धाविका सीमा कुमारी ने एक बार फिर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियन गेम्स-2026 में सीमा ने महिला वर्ग की 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। सीमा ने 32 मिनट 50.05 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सीमा की इस उपलब्धि की खास बात यह है कि महिला 10 हजार मीटर दौड़ में एशियन गेम्स के स्तर पर भारत को 16 साल बाद पदक मिला है। इससे पहले भारत ने इस स्पर्धा में 2010 के एशियन गेम्स में पदक जीते थे।

 

जापान के नागोया में आयोजित फाइनल मुकाबले में एशिया की कई मजबूत धाविकाएं मैदान में थीं। सीमा ने शुरुआत से ही मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी और अंतिम चरण तक पदक की दौड़ में बनी रहीं। आखिरी लैपों में उन्होंने अपनी रफ्तार और धैर्य का शानदार परिचय दिया और कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32:39.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि जापान की नोजोमी तनाका 32:41.54 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। सीमा ने 32:50.05 के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

 

यह भी पढ़ें: कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर पिस्टल शूटिंग में भारत को दिलाया गोल्ड

 

सीमा चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र के रेटा़ गांव की रहने वाली हैं। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर हिमाचल की ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। सीमा की इस उपलब्धि पर उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। जिस समय सीमा जापान में देश के लिए दौड़ रही थीं, उस समय चुराह स्थित उनका परिवार टेलीविजन और मोबाइल स्क्रीन पर उनकी रेस देख रहा था। जैसे-जैसे रेस अंतिम चरण में पहुंची, परिवार की धड़कनें भी बढ़ती गईं और सीमा के पदक जीतते ही खुशी का माहौल बन गया।

मां और भाई की आंखों के सामने बेटी ने रचा इतिहास

सीमा के भाई राजकुमार और उनकी माता केसरी ने घर पर सीमा की रेस देखी। सीमा के कांस्य पदक जीतते ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव में भी लोगों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं। परिवार का कहना है कि सीमा ने अपनी मेहनत और संघर्ष से न केवल परिवार बल्कि पूरे चुराह और चंबा को गौरवान्वित किया है। सीमा की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद उन प्रतिभाओं के लिए भी संदेश है, जिन्हें बेहतर अवसर और सुविधाएं मिलने पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं।

 

पूर्व जिला परिषद सदस्य मनोज कुमार ने भी सीमा की ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि चुराह जैसे दुर्गम क्षेत्र से निकलकर एशियन गेम्स के मंच पर भारत के लिए पदक जीतना पूरे चंबा के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सीमा की सफलता से क्षेत्र के युवाओं और विशेषकर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल आने वाली बाहरी गाड़ियों को बड़ी राहत, खत्म होगा कंपोजिट शुल्क

पहले भी देश-प्रदेश का नाम कर चुकी हैं रोशन

सीमा की यह उपलब्धि उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का परिणाम है। जून 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 10 हजार मीटर दौड़ में भी सीमा ने स्वर्ण पदक जीता था और इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई किया था। उस रेस में उन्होंने 34:28.75 मिनट का समय निकाला था। अब जापान में उन्होंने अपने समय में उल्लेखनीय सुधार करते हुए 32:50.05 का समय निकाला और एशियन गेम्स के पोडियम पर जगह बनाई।

 

10 हजार मीटर की ट्रैक रेस में धावकों को 400 मीटर के ट्रैक के 25 चक्कर लगाने होते हैं। यह स्पर्धा केवल गति ही नहीं बल्कि लंबी दूरी तक लगातार रफ्तार बनाए रखने, रणनीति, धैर्य और अंतिम चरण में जोर लगाने की परीक्षा भी होती है। सीमा ने इसी धैर्य और मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए अंतिम दौर तक खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा और इतिहास रच दिया।

चंबा से उठी आवाज, पूरे हिमाचल में खुशी

सीमा के कांस्य पदक के साथ ही चंबा के रेटा गांव का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर पहुंच गया है। हिमाचल के खेल प्रेमियों और सीमा के समर्थकों में खुशी का माहौल है। सीमा की उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि ग्रामीण हिमाचल की खेल प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान है। रेटा गांव से नागोया के एथलेटिक्स ट्रैक तक पहुंची सीमा ने दिखाया है कि छोटे गांवों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी एशिया के सबसे बड़े खेल मंच पर देश का तिरंगा फहरा सकती हैं।