हिमाचल की विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की कड़वी सच्चाई सामने आई है। प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के 3,214 राजकीय प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां पूरी पढ़ाई की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक के कंधों पर है। यही नहीं, 101 राजकीय माध्यमिक विद्यालय भी एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक तरफ स्कूलों में शिक्षक कम हैं और दूसरी तरफ हजारों शिक्षक भर्ती की राह देख रहे हैं। प्रदेश में जेबीटी और टीजीटी के कुल 5,209 पद खाली पड़े हैं। इनमें अकेले जेबीटी के 4,019 पद शामिल हैं। टीजीटी में कला के 646, नॉन मेडिकल के 318 और मेडिकल के 226 पद रिक्त हैं।
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एक शिक्षक के भरोसे पूरी कक्षा
विधानसभा में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विधायकों के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि प्रदेश के 3,214 प्राथमिक और 101 माध्यमिक स्कूल एक-एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 393 प्राथमिक और तीन माध्यमिक स्कूलों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है। यानी कई सरकारी स्कूलों में एक शिक्षक को ही कई कक्षाओं, अलग-अलग विषयों और बच्चों की पूरी शैक्षणिक जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इसका सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता और बच्चों को मिलने वाले व्यक्तिगत ध्यान पर पड़ना स्वाभाविक है।
जेबीटी के 4 हजार से ज्यादा पद खाली
प्रदेश में जेबीटी के 20,116 स्वीकृत पदों में से 14,132 पद भरे हुए हैं, जबकि 4,019 पद खाली हैं। टीजीटी की विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। कुल मिलाकर जेबीटी-टीजीटी के 36,835 स्वीकृत पदों में 29,155 भरे हुए हैं। ये आंकड़े प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
भर्ती की रफ्तार पर भी सवाल
31 जुलाई 2026 तक टीजीटी के 1,190 पद रिक्त थे। इनमें से 764 पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इनमें महज 13 पद बैचवाइज भर्ती के जरिए भरे जा रहे हैं। सरकार ने बताया कि फिलहाल इन 13 पदों के अलावा टीजीटी के किसी अन्य पद के लिए बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही है। सरकार के अनुसार 2024 में निर्धारित बैचवाइज कोटे के तहत जेबीटी के 1,161 और टीजीटी के 1,042 पद भरे गए थे। शेष रिक्तियों को भी चरणबद्ध तरीके से भरने की बात कही गई है।
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व्यवस्था पर उठे सवाल
विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े हिमाचल की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने रखते हैं, जिसमें कई स्कूल शिक्षक के इंतजार में हैं और कई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के इंतजार में। सबसे बड़ा सवाल यही है, जब स्कूलों में शिक्षक चाहिए और हजारों पद स्वीकृत होने के बावजूद खाली हैं, तो भर्ती प्रक्रिया को तेज करने में आखिर देरी क्यों? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में सरकारी स्कूल ही बच्चों की शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा हैं। ऐसे में एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हजारों स्कूल सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हिमाचल के हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल हैं।
