उत्तर प्रदेश के जिला जालौन में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और 67 वर्षीय अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में जमीन विवाद को लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता की हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। करीब 32 बीघा जमीन पर मालिकाना हक को लेकर वर्षों से चल रही रंजिश आखिरकार खूनी वारदात में बदल गई। साजिश के तहत अधिवक्ता को पहले कार में बैठाया गया, फिर अगवा कर कानपुर ले जाया गया, जहां उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि सुपारी लेने का आरोपी मोनू यादव अभी फरार है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
पुलिस जांच के मुताबिक, हत्या की वजह करीब 32 बीघा जमीन का विवाद था। कदौरा क्षेत्र के चतेला गांव निवासी माधव सिंह के पास करीब एक हजार बीघा जमीन थी। उन्होंने हांसा गांव की 32 बीघा जमीन अपनी नातिन अपर्णा सिंह के नाम कर दी थी। माधव सिंह और उनके बेटे रामगोपाल की मौत के बाद वर्ष 1990 में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार ने वसीयत के आधार पर इस जमीन पर अपना दावा कर दिया था। इसके बाद अपर्णा सिंह और गयादीन के बीच जमीन को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।वर्ष 2019 में अपर्णा सिंह ने यह जमीन मैनपुरी निवासी इंद्रपाल सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह यादव को बेच दी। इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। जमीन पर कब्जे और मालिकाना हक को लेकर गयादीन और इंद्रजीत के बीच मुकदमेबाजी चलती रही। पुलिस के मुताबिक, इसी रंजिश में अधिवक्ता की हत्या की साजिश रची गई।
पहले भी हो चुका था विवाद
जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ था। जून 2026 में अधिवक्ता गयादीन ने कदौरा थाने में शिकायत की थी। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने एसपी से भी शिकायत की और न्यायालय की शरण ली थी। आरोप है कि जमीन के विवाद को लेकर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था और धमकियां भी मिल रही थीं।13 जून को विवादित खेत में ट्यूबवेल लगाने के लिए गड्ढा खोदे जाने की सूचना पर गयादीन मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने डायल 112 पर सूचना दी थी। आरोप है कि खेत से लौटते समय हांसा-बबीना मोड़ पर उनकी बाइक रोककर मारपीट की गई थी। इस मामले में इंद्रजीत यादव, उसकी पत्नी सविता समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। इसके बाद भी जमीन का विवाद शांत नहीं हुआ।
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बहाने से कार में बैठाकर किया अगवा
31 अक्टूबर को गयादीन अहिरवार एक मुकदमे की सुनवाई के सिलसिले में जालौन आए थे। दोपहर बाद वह कालपी पहुंचे। उनका बेटा हर्षनाथ स्कूटर से उन्हें घर छोड़ने जा रहा था। रास्ते में मोनू यादव मिला। उसने जरूरी दस्तावेज देने और चाय-नाश्ता कराने के बहाने गयादीन को अपनी कार में बैठने के लिए कहा।पुलिस के मुताबिक, कार में पहले से तीन लोग मौजूद थे। आरोप है कि एक व्यक्ति ने गयादीन के पैर छुए और सम्मान जताते हुए उन्हें बातचीत के बहाने कार में बैठा लिया। इसके बाद उन्हें बेटे से अलग कर अगवा कर लिया गया। काफी देर तक घर नहीं पहुंचने और मोबाइल फोन बंद मिलने पर परिवार ने तलाश शुरू की। बाद में पुलिस को अपहरण की सूचना दी गई।
कानपुर ले जाकर कर दी हत्या
पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता को कार से कानपुर ले जाया गया। वहां गुजैनी क्षेत्र के गंभीरपुर में नहर के पास उनकी हत्या कर शव फेंक दिया गया। कालपी से करीब 70 किलोमीटर दूर शव मिलने के बाद मामले में पुलिस की जांच तेज हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की हड्डियां टूटने और शरीर पर सात गहरे घाव मिलने की बात सामने आई। आरोपियों ने जैक और अन्य भारी औजारों से हमला किया था।जांच के दौरान पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल कार बरामद की। कार से खून लगा जैक और पाना भी मिला। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या से जुड़े साक्ष्य जुटाए।
दो शूटरों के पैर में मारी गोली
पुलिस ने मामले में कानपुर निवासी सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार को गिरफ्तार किया। इनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल कार और अन्य सामान बरामद किया गया। रविवार रात कालपी क्षेत्र के जोधर नाले के पास जंगल में पुलिस आरोपियों को लेकर पहुंची थी। इसी दौरान दो आरोपियों ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में सर्वेश और आशीष के पैर में गोली लगी। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।इसके बाद पुलिस ने हत्या की साजिश रचने के आरोपी इंद्रजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया। इस तरह मामले में अब तक चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
10 लाख की सुपारी, मोनू पर इनाम
पुलिस के खुलासे के मुताबिक, इंद्रजीत यादव ने अधिवक्ता की हत्या कराने के लिए मोनू यादव को 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी। मोनू ने तीन शूटरों के जरिए वारदात को अंजाम दिलाया। पुलिस का दावा है कि मोनू ने ही इंद्रजीत और शूटरों के बीच संपर्क कराया था और हत्या की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।एसपी सुरेश चंद्र रावत के मुताबिक, मोनू के पिता अजय यादव के मोबाइल फोन से इंद्रजीत और मोनू के बीच घटना से पहले और बाद की व्हाट्सएप चैट मिली हैं। इन चैट के आधार पर पुलिस ने साजिश की कड़ियां जोड़ी हैं। मोनू यादव अभी फरार है। पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और एनएसए के तहत कार्रवाई की भी तैयारी कर रही है।
पांच करोड़ मुआवजे की मांग
कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता की हत्या से जिले के वकीलों में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला किया है। कानपुर के अधिवक्ताओं ने भी दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया है।अधिवक्ताओं ने पीड़ित परिवार को पांच करोड़ रुपये मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग उठाई है। परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
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मोनू की गिरफ्तारी से खुलेंगे राज
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या की साजिश का खुलासा करने का दावा किया है, लेकिन सुपारी लेने के आरोपी मोनू यादव की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जमीन विवाद को लेकर पहले हुई शिकायतें, कथित धमकियां और हत्या के लिए दी गई सुपारी इस मामले को और गंभीर बना रही हैं। अब पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र मोनू की गिरफ्तारी और सुपारी के लेनदेन से जुड़े बाकी साक्ष्य हैं। मोनू के पकड़े जाने के बाद इस खूनी साजिश में शामिल अन्य लोगों और पूरी योजना को लेकर और खुलासे हो सकते हैं।
