बिहार विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) का स्ट्राइक रेट काफी खराब रहा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जेडीयू को 8 में से 4 सीटें दी थीं, जिनमें से पार्टी को केवल एक सीट पर जीत मिली। हार के बाद पार्टी ने पटना स्थित अपने कार्यालय में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे गायब रहे। पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार , केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार बैठक में शामिल नहीं हुए। यह बैठक प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक का उद्देश्य तीन सीटों पर मिली हार के कारणों की समीक्षा करना था। बैठक में संगठन की कमजोरी और चुनाव के दौरान नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। चार सीटों में से जेडीयू को सिर्फ पटना स्नातक सीट पर जीत मिली, जबकि सारण, दरभंगा समेत तीन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। बैठक में चुनाव जीतने और हारने वाले उम्मीदवारों के साथ संबंधित जिलों के जिलाध्यक्षों और प्रभारियों को भी बुलाया गया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं को चिह्नित करने पर भी चर्चा हुई।
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नीतीश-निशांत बैठक से गायब
समीक्षा बैठक से तीन बड़े नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। नीतीश कुमार, ललन सिंह और निशांत कुमार बैठक में नहीं पहुंचे। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि तीनों नेता पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे। इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं हो सके।
चार सीटों में से जेडीयू को सिर्फ पटना स्नातक सीट पर जीत मिली। इस जीत से पार्टी का हौसला बढ़ा है। बैठक में जीतने वाले उम्मीदवार को बधाई दी गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि पटना स्नातक सीट की जीत बताती है कि शिक्षित वर्ग अभी भी जेडीयू के साथ है। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, 'बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना होगा। चुनाव में हार से सबक लेना चाहिए। जो कमियां रह गईं, उन्हें दूर करना होगा।'
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'बीजेपी-जेडीयू का जोड़ फेविकोल वाला'
बैठक के बाद उमेश कुशवाहा ने बीजेपी के साथ अपने रिश्ते को लेकर बात की। उन्होंने कहा, 'बीजेपी से हमारा फेविकोल वाला जोड़ है। एनडीए पूरी तरह मजबूत है और इसमें कोई दरार नहीं है। एमएलसी चुनाव में हार से पार्टी हताश नहीं है। हार के कारणों की समीक्षा की गई है। आगे संगठन को और मजबूत किया जाएगा।'
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा सारण और दरभंगा सीटों पर हुई हार को लेकर हुई। इन दोनों सीटों पर जेडीयू को जीत की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, बैठक में जिलाध्यक्षों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर तालमेल की कमी, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और विपक्ष की मजबूत रणनीति के कारण हार हुई। कई नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान कुछ नेता और कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ काम कर रहे थे। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है।
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'पार्टी विरोधियों पर होगी कार्रवाई'
बैठक में यह भी तय हुआ कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी जांच कर रिपोर्ट देगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव के दौरान कुछ लोगों ने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम किया। ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। बैठक में आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई। आने वाले विधानसभा उपचुनाव और लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने तैयारी शुरू कर दी है। उमेश कुशवाहा ने कहा कि पार्टी पूरी ताकत के साथ आगे के चुनावों में उतरेगी। संगठन को मजबूत किया जाएगा और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा।
क्या जेडीयू का जनाधार खिसक रहा?
जेडीयू की इस समीक्षा बैठक की चर्चा राजनीतिक गलियारों में भी हो रही है। विपक्ष का कहना है कि जेडीयू की हार बताती है कि पार्टी का जनाधार खिसक रहा है। वहीं, जेडीयू नेताओं का कहना है कि एक चुनाव की हार से कुछ तय नहीं होता। पार्टी और मजबूत होकर उभरेगी। फिलहाल, जेडीयू ने हार की समीक्षा कर ली है। अब पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुट गई है।
