झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी दांव-पेच में उलझ गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस बड़े फैसले पर रोक लगा दी, जिसके तहत झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और उससे जुड़ी सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा, कोर्ट ने सीजीएल परीक्षा और सीडीपीओ की नियुक्ति को भी रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर झारखंड में करीब 26 दिनों तक छात्रों का आंदोलन चला था। इसके बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा कदम उठाते हुए JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा सहित कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया।

 

सरकार के फैसले से एक नई मुसीबत खड़ी हो गई थी, जो लोग इन्हीं परीक्षाओं को पास करके पहले से डेंटल डॉक्टर, सिविल जज, असिस्टेंट इंजीनियर और डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर नौकरी कर रहे थे, उनके सिर पर नौकरी का खतरा मंडरा लगा। फिर उन्होंने फिर झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

 

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क्या है पूरा विवाद? 

झारखंड में यह पूरा विवाद सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ था। दरअसल, राज्य में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) समय-समय पर अलग-अलग सरकारी पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। इनमें से कई परीक्षाओं का जिम्मा एक निजी आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को भी दिया गया था। समय के साथ इन परीक्षाओं में पेपर लीक होने और भर्ती प्रक्रिया में धांधली की शिकायतें आने लगीं। 

 

इससे नाराज छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों तक आंदोलन किया। कई दौर की बातचीत के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं और 23 अन्य की जांच के आदेश दिए। इससे आंदोलन कर रहे छात्रों की जीत तो हुई लेकिन इसके साथ ही एक नई समस्या खड़ी हो गई। सरकार के इस फैसले से ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, सिविल जज जैसे पदों पर पहले से नियुक्त लोगों की नौकरी खतरे में आ गई। 

 

इससे परेशान होकर कई अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को कोर्ट ने राहत देते हुए JPSC की 11वीं-13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी, सरकार से 15 दिन में जवाब मांगा है। इसके अलावा, शुक्रवार 21 अगस्त को कोर्ट ने सीजीएल परीक्षा और सीडीपीओ की नियुक्ति को भी रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। 

झारखंड पेपर लीक केस, कब क्या हुआ?

  • शुरुआत: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की शिकायतें मिलीं।
  • छात्र आंदोलन: इससे नाराज छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों तक धरना दिया।
  • 18 अगस्त 2026: हेमंत सोरेन सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दे दिए।
  • प्रभावित लोग कोर्ट पहुंचे: दूसरी ओर सरकार के फैसले से परीक्षा पास कर नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों की नौकरी पर खतरा बन पड़ा
  • झारखंड हाई कोर्ट में याचिका: इसके बाद परेशान अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।
  • 20 अगस्त 2026: हाई कोर्ट ने JPSC की 11वीं-13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के आदेश लगाते हुए सरकार से 15 दिन में जवाब मांगा।
  • 21 अगस्त 2026: कोर्ट ने CGL परीक्षा और CDPO की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी।

बता दें कि फिलहाल इन चार परीक्षाओं (JPSC 11वीं-13वीं, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CGL, CDPO) पर रोक लगी है। बाकी परीक्षाओं का मामला अभी जस का तस है, यानी यह कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

 

कौन-कौन है इसमें शामिल, किसपर पड़ा असर? 

इस पूरे विवाद में हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों के दबाव में भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया। छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों तक धरना देकर इस मुद्दे को उठाया। परीक्षा कराने का काम JPSC, JSSC और एक निजी कंपनी TDPL करती थी, जिन पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। 

 

इसके अलावा, दूसरी तरफ, डेंटल डॉक्टर, सिविल जज, इंजीनियर, डिप्टी कलेक्टर, इंस्पेक्टर और प्रोफेसर जैसी नौकरियों पर पहले से काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी परीक्षा रद्द होने से खतरे में आ गई। यही परेशान अभ्यर्थी राहत की उम्मीद में झारखंड हाई कोर्ट पहुंचे, जहां कोर्ट ने उनकी बात सुनकर सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। 

कहां चल रहा है यह पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद झारखंड राज्य से जुड़ा है। इसके अलावा, छात्रों का आंदोलन राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हुआ, जहां वे 26 दिनों तक धरने पर बैठे रहे। सरकार का परीक्षा रद्द करने का फैसला झारखंड सचिवालय से जुड़े कार्मिक, प्रशासनिक सुधार- राजभाषा विभाग की अधिसूचना के जरिए आया। वहीं इस पूरे मामले की कानूनी लड़ाई झारखंड हाई कोर्ट, रांची में लड़ी जा रही है। बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है, अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

 

 

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कैसे शुरु हुआ यह पूरा मामला?

बता दें कि इस पूरे मामले में CID-SIT जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सरकार ने 18 अगस्त 2026 की रात TDPL एजेंसी की 22 परीक्षाएं रद्द कीं, जिनमें JPSC 11वीं-13वीं, CDPO, JSSC-CGL जैसी बड़ी भर्तियां भी शामिल थीं। इसके साथ ही 6 परीक्षाएं स्थगित कर उनकी, साथ में 17 अन्य परीक्षाओं की जांच शुरू की गई। प्रभावित कर्मचारियों की याचिका पर जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई हुई। बताते चलें कि इसके लिए IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जो दो महीने में रिपोर्ट देगी।

अब आगे क्या? 

अब तक 4 परीक्षाओं पर कोर्ट ने रोक लगाई है, बाकी 18 परीक्षाओं का मामला वैसे ही है। इसके लिए कोर्ट ने सरकार को 15 दिन में जवाब देने को कहा है। इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। सुधार के लिए बनी अमिताभ कौशल कमेटी भी दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। इससे आगे परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव हो सकते हैं।