बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अभियान चलाए जा रहे 45 दिवसीय जमाबंदी सुधार एवं उत्तराधिकार नामांतरण अभियान को लेकर विभाग सख्त हो गया है। अभियान की लगातार मॉनिटरिंग और अंचल स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को भी मुख्यालय के वरीय अधिकारियों की टीम फील्ड में उतरी थे। जिन्होंने 11 जिलों के 22 अंचल कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जमाबंदी सुधार, ऑनलाइन सेवाओं, अभिलेखागार और अभियान बसेरा की प्रगति की सघन समीक्षा की थी। सचिव जय सिंह की सख्त मॉनिटरिंग में यह निरीक्षण किया गया और लंबित मामलों के निपटारे और राजस्व कामों में लापरवाही पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।

 

विभागीय सूत्रों के अनुसार शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद वरीय अधिकारियों को फील्ड में भेजा गया, ताकि अंचल कार्यालयों में कामकाज की असली स्थिति पता चल सके। अक्सर शिकायत मिलती थी कि अंचल में समय पर काम नहीं होता, दाखिल-खारिज और परिमार्जन के मामले अटके रहते हैं। इसी को देखते हुए सचिव जय सिंह ने खुद इसकी मॉनिटरिंग शुरू की है और हर शनिवार को औचक निरीक्षण का निर्देश दिया है।

 

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ऑनलाइन सेवाओं का भी लिया जायजा

विभाग ने 11 पदाधिकारियों को मुजफ्फरपुर, बक्सर, औरंगाबाद, बेगूसराय, शिवहर, लखीसराय, सीतामढ़ी, बांका, भागलपुर, पश्चिम चंपारण और खगड़िया जिले के संबंधित अंचलों की जिम्मेदारी दी गई थी। सभी अधिकारियों ने दो-दो अंचलों का निरीक्षण किया।निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह ने मुजफ्फरपुर के मीनापुर एवं कांटी, अपर सचिव डॉ. महेन्द्र पाल ने बक्सर सदर एवं इटाढ़ी, अपर सचिव आजीव वत्सराज ने औरंगाबाद के गोह एवं हसपुरा, संयुक्त सचिव डॉ. सुनील कुमार ने बेगूसराय के भगवानपुर एवं वीरपुर तथा संयुक्त सचिव संजय कुमार सिंह ने शिवहर के शिवहर एवं पिपराही अंचल का निरीक्षण किया। 

 

इसी सिलसिले में विशेष कार्य पदाधिकारी मणि भूषण किशोर ने लखीसराय एवं हलसी, उप निदेशक सर्वेक्षण कार्यालय गुलजारबाग मोना झा ने सीतामढ़ी के डुमरा एवं रीगा, विशेष कार्य पदाधिकारी मो. नवाजिश अख्तर ने बांका एवं बाराहाट, उप सचिव अविनाश कुमार ने भागलपुर के नाथनगर एवं सबौर, उप निदेशक कृषि गणना अशोक कुमार शर्मा ने पश्चिमी चंपारण के बैरिया एवं बेतिया तथा सहायक निदेशक कृषि गणना सुमित कुमार आनंद ने खगड़िया सदर एवं गोगरी अंचल का निरीक्षण किया।

 

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सिर्फ कार्यालयी रिकॉर्ड की समीक्षा नहीं की, बल्कि लंबित मामलों, अभिलेखों के रखरखाव और ऑनलाइन सेवाओं के वास्तविक निष्पादन की स्थिति भी देखी। कई अंचलों में अभिलेखागार की स्थिति खराब मिली, तो कई जगह कंप्यूटर बंद मिले। अधिकारियों ने मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए।

कई मामलों की हुई समीक्षा

निरीक्षण के दौरान ऑनलाइन दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, लेफ्ट आउट जमाबंदी और ई-मापी से संबंधित लंबित आवेदनों एवं उनके निष्पादन की स्थिति की भी जांच की गई। अधिकारियों ने यह भी देखा कि लंबित मामलों के निष्पादन में अनावश्यक देरी तो नहीं हो रही है। कई अंचलों में दाखिल-खारिज के मामले 30 दिन से ज्यादा से लंबित मिले, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई और तुरंत निष्पादन के निर्देश दिए।

 

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45 दिवसीय जमाबंदी अद्यतीकरण एवं उत्तराधिकार नामांतरण विशेष अभियान के तहत जमाबंदियों के शुद्धीकरण, मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सुधार की प्रगति की भी समीक्षा की गई। विभाग ने 45 दिन का विशेष अभियान चलाया है, जिसके तहत जिन रैयतों की मृत्यु हो गई है, उनके जमाबंदी में उनके उत्तराधिकारियों का नाम चढ़ाना है। कई अंचलों में इस काम में लापरवाही बरती जा रही थी, जिस पर अधिकारियों ने सीओ और राजस्व कर्मचारियों को फटकार लगाई। अधिकारियों ने कहा कि जमाबंदी में गड़बड़ी के कारण ही जमीन विवाद बढ़ रहे हैं। यदि जमाबंदी सही होगी तो विवाद कम होगा। इसलिए अभियान को गंभीरता से लें और हर जमाबंदी को शुद्ध करें।

भूमिहीन परिवारों की पहचान की समीक्षा

अभियान बसेरा के तहत वासभूमिहीन परिवारों के पात्रता सत्यापन और आगामी नवंबर माह में पर्चा निर्गत किए जाने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने पात्र परिवारों की पहचान, सत्यापन और वितरण से संबंधित तैयारियों की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। जिन परिवारों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें सरकार 5 डिसमिल जमीन दे रही है। नवंबर में इसका पर्चा बांटा जाना है, उससे पहले सत्यापन का काम पूरा करना है। कई अंचलों में सत्यापन का काम धीमा मिला, जिस पर तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

 

निरीक्षण के दौरान 3 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि के भौतिक सत्यापन, लॉक जमाबंदियों को अनलॉक करने, भू-अभिलेख पोर्टल पर स्कैन अभिलेख अपलोड करने तथा गलत प्रश्नावली वाले दाखिल-खारिज आवेदनों पर की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। सरकारी जमीन पर कई जगह अतिक्रमण मिला, जिस पर अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही राजस्व कर्मचारियों की दैनिक दैनिकी यानी के.सी. डायरी, मोबाइल ऐप पर उपस्थिति तथा जाली दस्तावेजों के आधार पर किए गए मामलों में प्राथमिकी की स्थिति की भी जांच की गई। कई अंचलों में राजस्व कर्मचारी बिना के.सी. डायरी के मिले और कई जगह जाली दस्तावेज के आधार पर जमीन का नामांतरण कर दिया गया था, लेकिन FIR नहीं हुई थी। इस पर अधिकारियों ने सख्त नाराजगी जताई और तुरंत FIR करने के निर्देश दिए।