राजस्थान के जोधपुर शहर में मंडोर खुली जेल के अंदर उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदियों की शादी करा दी गई है। इस शादी को कराने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट ने इजाजत दी थी। अदालत ने कहा है कि जेल में बंद होने के बाद भी हर इंसान को अपने जीवन के जरूरी फैसले लेने और शादी करने का अधिकार है। यह शादी जेल के अंदर ही पूरी की गई है जिसमें परिवार के लोगों के साथ-साथ जेल के अधिकारी भी शामिल रहे।
दूल्हे का नाम मूलाराम भाटी है और उनकी उम्र 33 साल है। वह नागौर जिले के रहने वाले हैं और फरवरी 2017 से जेल में बंद हैं। उन पर अपने पड़ोसी की हत्या का आरोप साबित हुआ था। वह जेल में अच्छे से रह रहे थे इस वजह से उन्हें दो साल पहले अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर खुली जेल में भेज दिया गया था। इस शादी में दुल्हन का नाम सीमा घड़से है और उनकी उम्र 31 साल है। वह मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं और अपने पति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही हैं। वह भी जेल में अच्छे से रहती थीं इस वजह से उन्हें डेढ़ साल पहले महिलाओं की जेल से इस खुली जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।
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जेल के अंदर कैसे हुई शादी?
यह शादी जोधपुर की मंडोर खुली जेल के अंदर हुई है। इस शादी में कुल 21 लोग शामिल हुए थे। इन लोगों में दूल्हा-दुल्हन के परिवार वाले, जेल के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा वाले लोग शामिल थे। शादी के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला डाली और मंडप में सात फेरे लिए। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने नए जोड़े को आशीर्वाद दिया और जेल में सभी को मिठाइयां बांटी गईं।
यह शादी राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस पीएस भाटी और जस्टिस प्रवीण भटनागर के आदेश से हुई है। अदालत ने साफ कहा कि जेल में सजा काट रहे इंसान से शादी करने का अधिकार नहीं छीना जा सकता है। अदालत ने बताया कि अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनना और शादी करना हर इंसान की निजी जिंदगी का हक होता है।
कोर्ट में अर्जी
जोधपुर की इस खुली जेल में दोनों खेती-बाड़ी का काम साथ में करते थे। साथ काम करते-करते दोनों की बातचीत होने लगी और दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। शादी की अनुमति पाने के लिए मूलाराम ने हाईकोर्ट में अर्जी दी थी और अपनी सजा को कुछ समय के लिए रोकने की मांग की थी ताकि वे शादी कर सकें।
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सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि दोनों कैदियों ने अपनी मर्जी से शादी की इच्छा जताई है और खुली जेल के नियमों के हिसाब से उन्हें यह शादी कराने पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यह शादी जेल के अफसरों की देखरेख में होगी और एक पंडित समेत कुल 21 मेहमानों को जेल के अंदर आने की छूट दी जाए।
