दिल्ली के विधानसभा क्षेत्र-69, मुस्तफाबाद में फर्जी और गलत तरीके से Form-7 भरने की खबर सामने आने के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय ने इन आवेदनों की जांच कराई, जांच में कुल 37 आवेदनों में से सिर्फ एक सही पाया गया, जबकि 36 आवेदन गलत और फर्जी पाए गए। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, एक बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने 37 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form-7 भरे थे। इनमें तीन मतदाताओं को मृत और 34 को अपने पते से अनुपस्थित या स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट बताया गया था। 

 

इस मामले में संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और अन्य अधिकारियों के सत्यापन में पाया गया कि जिन तीन लोगों को मृत बताया गया था, वे सभी जीवित थे और अपने पंजीकृत पते पर रह रहे थे। वहीं, 34 में से 33 मतदाता भी अपने दर्ज पते पर ही मिले। केवल एक मतदाता दूसरी जगह शिफ्ट हुआ था। इस मामले में ERO ने RP एक्ट (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम) की धारा 31 के तहत BLA के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

 

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क्या है पूरा मामला?

इस मामले में मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने शुक्रवार (7 नवंबर, 2026) को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। हाल ही में 'द हिंदू' की रिपोर्ट में सामने आया था कि अपने पतों पर रह रहे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फर्जी 'फॉर्म 7' दाखिल किए गए। इस मामले में उत्तर-पूर्वी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) अजय कुमार ने बताया कि चुनाव अधिकारियों ने इस खबर की स्वतंत्र रूप से जांच की है और पाया कि 37 में से 36 'फॉर्म 7' फर्जी या मनगढ़ंत हैं।

 

 

कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, 'प्रिंट और सोशल मीडिया में फर्जी और मनगढ़ंत 'फॉर्म 7' के बारे में आई खबरों के संबंध में, ERO ने आज पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें RP एक्ट 1950 की धारा 31 के तहत BLA के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।'

भारतीय जनता पार्टी  से जुड़ा नाम

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के 28 अक्टूबर तक के रिकॉर्ड के अनुसार, ये फॉर्म भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े BLA, चंद्र शेखर नैनवाल द्वारा दाखिल किए गए थे। हालांकि, 'द हिंदू' से बातचीत में नैनवाल ने इन आवेदनों को दाखिल करने से इनकार किया और कहा कि उनका BJP से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद, 29-30 अक्टूबर को नौ और नए आवेदन दाखिल किए गए, जिनमें आपत्ति जताने वाले व्यक्ति के रूप में उन्हीं (नैनवाल) का नाम दिया गया था। 

 

इन आवेदनों में नाम हटाने का कारण अनुपस्थित/स्थायी रूप से कहीं और चले गए और मृत बताया गया था। इसमें आगे कहा गया है कि BLO/AERO ने सभी 37 फॉर्मों की जांच की। जांच में पता चला कि जिन तीन मतदाताओं को मृत बताया गया था, वे अपने पते पर जीवित मिले। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि केवल एक मामला सही पाया गया, जबकि 36 मामले झूठे या मनगढ़ंत निकले।