लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीए नरपत डुकिया को मंदिर संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंप दी है। उन्हें इकाई प्रमुख बनाया गया है। इसी बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने गर्भगृह के पास स्थित उस विशेष लॉकर का सत्यापन किया, जिसमें श्रद्धालुओं की ओर से रामलला को अर्पित किए गए बहुमूल्य आभूषण और कीमती भेंट सुरक्षित रखी जाती हैं। एसआईटी ने लॉकर में रखे आभूषणों का ट्रस्ट के अभिलेखों और दान की रसीदों से मिलान भी किया।

 

राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को और भी व्यवस्थित करने के लिए नरपत डुकिया को जिम्मेदारी सौंपी है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन की ओर से जारी आदेश के अनुसार डुकिया मंदिर की सभी प्रशासनिक व्यवस्था का समन्वय करेंगे। विभिन्न विभागों के बीच तालमेल, व्यवस्थाओं की निगरानी और ट्रस्ट के फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी।

 

 

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दान में मिले आभूषणों का रिकॉर्ड से मिलान

 

एसआईटी ने जांच के दौरान गर्भगृह के पास रखे विशेष लॉकर में सुरक्षित बहुमूल्य वस्तुओं का सत्यापन किया। सूत्रों के मुताबिक लॉकर में रखे आभूषणों और अन्य कीमती भेंट का मिलान ट्रस्ट के रिकॉर्ड और संबंधित रसीदों से किया गया। श्रद्धालुओं की ओर से सोना, चांदी या अन्य कीमती आभूषण रामलला को अर्पित किए जाने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले उनका वजन किया जाता है।

 

इसके बाद उसका अभिलेखीकरण कर श्रद्धालु को रसीद दी जाती है और आभूषण को सुरक्षित लॉकर में रख दिया जाता है। एसआईटी ने इसी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और लॉकर में मौजूद वस्तुओं का बिंदुवार सत्यापन किया।

 

लॉकर की सुरक्षा में तीन चाबियां

 

गर्भगृह के पास रखे इस विशेष लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था बहुस्तरीय है। बताया जाता है कि लॉकर की तीन चाबियां हैं। इनमें एक चाबी वर्तमान में मंदिर संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे नरपत डुकिया के पास है, जबकि दो अन्य चाबियां शैलेंद्र शुक्ल और विंदेश्वरी सिंह के पास रहती हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत समन्वय के बाद ही लॉकर खोला जाता है। इससे लॉकर में रखी बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत रखा गया है।

 

इससे पहले एसआईटी राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक लॉकर में सुरक्षित आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की जांच कर उनकी वीडियोग्राफी करा चुकी है। अब गर्भगृह के पास रखे लॉकर का सत्यापन भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। चढ़ावा चोरी प्रकरण में एसआईटी मंदिर में दान और उसके सुरक्षित रखे जाने से जुड़ी पूरी व्यवस्था की पड़ताल कर रही है।

 

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आचार्य इंद्रदेव मिश्र सहयोगी बनाए गए

 

नई व्यवस्था में आचार्य इंद्रदेव मिश्र को नरपत डुकिया का सहयोगी नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 तक रहेगा। ट्रस्ट की इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन और धार्मिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग रखते हुए दोनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। राम मंदिर के खातों के संचालन की जिम्मेदारी देख रहे ट्रस्ट के इंजीनियर जगदीश आफले को सचिव बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

 

हालांकि ट्रस्ट की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन ट्रस्ट के विभिन्न पत्रों में उन्हें सचिव के तौर पर संबोधित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इस नियुक्ति पर औपचारिक मुहर लग सकती है।

 

चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच राम मंदिर की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों को अहम माना जा रहा है। एक तरफ एसआईटी दान में मिले आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड से मिलान कर रही है, वहीं ट्रस्ट मंदिर संचालन की जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने में जुटा है।