उत्तराखंड के नैनीताल जिले में कुंडा विधायक राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह के नाम दर्ज करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को प्रशासन ने सरकारी खाते में दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई उत्तराखंड के भू-कानूनों के उल्लंघन के आरोप में की गई है। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जमीन साल 2007 में खरीदी गई थी और करीब 17 वर्ष बाद इस पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।
जानकारी के अनुसार नैनीताल जिले के सिलटोना क्षेत्र में भानवी सिंह के नाम करीब 27.5 नाली भूमि खरीदी गई थी। उस समय उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के लोगों को कृषि और बागवानी के उद्देश्य से भूमि खरीदने की अनुमति दी जाती थी, लेकिन इसके साथ कई शर्तें भी लागू थीं। भानवी सिंह ने इस जमीन पर न खेती की, न बागवानी की। इसी वजह से प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
बागवानी न करने पर हुई कार्रवाई
उत्तराखंड के तत्कालीन भू-कानूनों के तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति बागवानी या कृषि के नाम पर जमीन खरीदता है तो उसे निर्धारित अवधि में उस भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करना होता है। अनुमति का आधार ही कृषि या बागवानी गतिविधियां होती हैं। राजस्व विभाग की जांच में पाया गया कि जिस उद्देश्य से भूमि खरीदी गई थी, उस पर बागवानी विकसित नहीं की गई। प्रशासन का कहना है कि वर्षों तक जमीन पर अपेक्षित गतिविधियां नहीं मिलीं, जिसके चलते इसे नियमों का उल्लंघन माना गया।
यह भी पढ़ें: दिल्ली से लखनऊ तक 5 बार हुई मीटिंग, नहीं हो पा रहा UP बीजेपी का संगठन विस्तार
2024 में शुरू हुई जांच
नैनीताल प्रशासन ने वर्ष 2024 में मामले की जांच शुरू की थी। राजस्व अभिलेखों की समीक्षा, स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की संस्तुति की। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी स्तर पर निर्णय लिया गया और भूमि को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
कानूनी लड़ाई में नहीं मिली राहत
सूत्रों के मुताबिक मामले को राजस्व न्यायिक मंचों पर भी चुनौती दी गई, लेकिन संबंधित पक्ष को राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद प्रशासन ने अंतिम कार्रवाई करते हुए जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया।
यह भी पढ़ें: संगठन और सीटें बढ़ाने की तैयारी, क्या है अनुप्रिया पटेल के अपना दल का प्लान?
भू-कानूनों पर फिर छिड़ी बहस
राजा भैया की पत्नी से जुड़ा मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड के भू-कानून एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई कृषि और बागवानी भूमि की समीक्षा करा रही है। कई मामलों में यह देखा जा रहा है कि भूमि खरीद के समय बताए गए उद्देश्य का पालन हुआ या नहीं।
अब क्या हो सकता है?
नैनीताल की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि उत्तराखंड में कृषि या बागवानी के नाम पर खरीदी गई जमीन को वर्षों तक खाली छोड़ना महंगा पड़ सकता है। प्रशासन अब पुराने मामलों की भी जांच कर रहा है और नियमों के उल्लंघन पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को भी सरकारी कब्जे में लेने से पीछे नहीं हट रहा।
