गुरुग्राम में 14 अगस्त के दिन आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह नाराज नजर आए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेतृत्व पर ही सवाल उठाते हुए अनदेखी का आरोप लगाया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने वह अपना दर्द रखने से खुद को नहीं रोक पाए। उन्होंने नितिन नवीन से सवाल किया कि आयोजन स्थल के सांसद को बुलाए बिना उनका वहां पहुंचना उचित था या नहीं। 

राव इंद्रजीत ने पानीपत और करनाल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां ऐसे कार्यक्रम होते तो स्थानीय नेताओं को जरूर आमंत्रित किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का कार्यक्रम न होता तो उन्हें बुलाया भी नहीं जाता और भाषणों में उनका नाम तक नहीं आता। राव इंद्रजीत सिंह ने स्थानीय लोगों को न बुलाने पर आपत्ति जताई और कहा कि राजस्थान से आए लोग भी मौजूद थे, लेकिन स्थानीय प्रतिनिधियों को जगह नहीं दी गई। 

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नितिन नवीन के सामने राव इंद्रजीत ने क्या कहा?

राव इंद्रजीत सिंह, केंद्रीय मंत्री:-
उल्टी गंगा बह रही है। सीनियर पहले बोल गए, जूनियर को बाद में बुलवाया जा रहा है। मैं धन्यवाद करता हूं कि अर्चना का। इन्होंने हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को आमंत्रित करके एक विशेष वर्ग का कार्यक्रम न रखते हुए सबका कार्यक्रम बना दिया गया। बतौर सांसद मैं आपका स्वागत कर रहा हूं लेकिन मुझे तो यह लग रहा था कि आपका स्वागत करने के लिए भी मुझे अवसर नहीं मिलेगा।

'मेरा बिना बुलाए जाना उचित था?', नितिन नवीन से सवाल

राव इंद्रजीत ने कहा, 'गुरुग्राम के अंदर, हरियाणा के अंदर,कई बाहरी लोग आए हैं। इस सभा के अंदर यहां के लोकल लोगों को नहीं बुलाया गया है।  इसकी मुझे आपत्ति है। जहां प्रधानमंत्री ने कहा कि 14 अगस्त को मनाओ विभाजन दिवस, क्योंकि यहां नतिन नवीन आएं हैं इसलिए मैं यहां पर उपस्थित हुआ। नितिन, आपसे मैं पूछना चाहता हूं कि ये पंजाबी कार्यक्रम करने वाले जिस हल्के के सांसद को आमंत्रित नहीं कर सकते तो क्या आपके बिना आए हुए यहां आना उचित था।?'

 

 

उन्होंने कहा, 'पहली बार किसी पंजाबी को मुख्यमंत्री पीएम मोदी ने बनाया था। दूसरी बार जनता ने बनाया। हरियाणा पहला प्रदेश है जहां से मेरे कार्यकाल के अंदर दो सेना के चीफ बने हैं। मैं कहूंगा दोनों हरियाणा वासी थे। लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग और दूसरे लेफ्टिनेंट जनरल कपूर। प्रोग्राम को आोयजित करन वाले ये कहेंगे कि एक हरियाणा का था दूसरा पंजाब का।'

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'आप ही आप हैं, मेरा कोई योगदान ही नहीं'

राव इंद्रजीत, केंद्रीय मंत्री:-
सिर्फ पंजाबियत के ऊपर या सिर्फ राजनीतिक तौर पर लेने के लिए आप लोगों को आमंत्रित करने वाले लोगों को सोचना चाहिए कि सिर्फ पंजाबी नाम के ऊपर अगर कोई इलेक्शन लड़ता है तो मदान अकेले 48 हजार वोट ले गए लेकिन जीते नहीं। आप लोगों ने ऐसे कर दिया, जैसे कि आप ही आप लोग हैं, हमारा कोई योगदान नहीं। अगर ये पार्टी का प्रोग्राम नहीं होता तो यहां मुझे बुलाया भी नहीं जाता। आज भाषणबाजी के अंदर मेरा नाम भी नहीं था।

'गनीमत है बुला लिया वरना...'

राव इंद्रजीत ने कहा, '36 कॉरपोर्टेर हैं, गुरुग्राम में कितने पंजाबी हैं, कितने कॉर्पोरेटर हैं, सिर्फ 2। जिन्होंने हमारा चीफ मिनिस्टर बनाया, मेयर, डिप्टी मेयर बनाया, आप लोग इस तरह से कह रहे हैं कि जैसे आप ही हैं, हमारा योगदान ही नहीं है। 2 चीफ बना दिया, मुख्यमंत्री बना दिया, विधायक बना दिया, आप बीजेपी के साथ रहो। गनीमत है बुला लिया, अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रोग्राम न होता तो मुझे बुलाया भी नहीं जाता। 

क्यों इस बात पर शोर मचा है?

राव इंद्रजीत ने ये बातें तब कहीं हैं, जब वहां मंच पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री, नायब सैनी, मनोहर लाल खट्टर और राज्य बीजेपी अध्यक्ष अर्चना गुप्ता मौजूद थीं। जिला समिति की ओर से जारी निमंत्रण पत्र में राव इंद्रजीत का नाम तो था लेकिन उनका दावा है कि उन्हें औपचारिक तौर पर निमंत्रित नहीं किया गया। 

 

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राव इंद्रजीत सिंह का दर्द क्या है?

केंद्रीय राज्य मंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह की भारतीय जनता पार्टी से नाराजगी कई बार सामने आ चुकी है। उनकी नाराजगी की एक वजह, हरियाणा में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और अनदेखी है। केंद्र में वह कैबिनेट चाहते हैं लेकिन राज्य मंत्री हैं। उन्हें टिकट बंटवारे में सीमित दखल को लेकर भी परेशानी है। वह दक्षिण हरियाणा (अहीरवाल) की उपेक्षा और स्थानीय राजनीति और गुटबाजी का आरोप लगाते रहे हैं।

 

साल 2024 में मनोहर लाल खट्टर के हटने के बाद नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी उनकी वरिष्ठता को दरकिनार किए जाने पर नाराजगी सामने आई थी। वह लंबे समय तक केंद्र सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे हैं, सांसद रहे हैं लेकिन पार्टी में तरजीह न मिलने को लेकर आक्रोश जाहिर करते रहे हैं। उनकी बेटी आरती सिंह राव भी हरियाणा सरकार में मंत्री हैं।

 

वह अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि विकास कार्यों और बजट में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम के साथ भेदभाव होता है। अहीरवाल की बदौलत बीजेपी मजबूत हुई, लेकिन अब उनका बीजेपी की जीत में अहम रोल होने के बाद भी वैसा सम्मान नहीं हो रहा है, जैसे वे चाहते हैं। यह विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। वह पुराने कांग्रेसी रहे हैं। एक चर्चा यह है भी है कि बीजेपी बाहरियों को संगठन के कार्यक्रमों में बहुत मन से स्वीकारती नहीं है। कई पुराने कांग्रेसी जो अब बीजेपी में है, उन्होंने उपेक्षा का आरोप लगाया है।