बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की न्यायिक जांच अब तेज हो गई है। आयोग के समक्ष भरत तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने करीब 2 घंटे तक दोनों से अलग-अलग गवाही ली। आयोग की ओर से परिवार के चार सदस्यों को गवाही के लिए बुलाया गया था। इनमें से मां और पिता आयोग के सामने पेश हुए। आयोग ने अब 13 जुलाई को भरत के भाई और भाभी को उपस्थित होकर गवाही देने का निर्देश दिया है।
न्यायिक जांच आयोग कार्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई गवाही के दौरान आशा देवी और काशीनाथ तिवारी ने अपनी बातें रखीं। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष के समक्ष तीन मुख्य मांगें रखीं। पहली मांग परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की थी। इसके बाद माता-पिता ने भरत को न्याय दिलाने की बात कही। उनकी तीसरी मांग दोषी पुलिसकर्मियों को सजा देने की थी। न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने परिजन की बातों को गंभीरता से सुना और सभी बिंदुओं को रिकॉर्ड किया।
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क्या बोले माता-पिता?
भरत तिवारी के पिता ने कहा, 'हम लोगों ने आयोग के सामने सब कुछ सच-सच बताया। मेरा बेटा निर्दोष था। पुलिस ने उसे झूठे एनकाउंटर में मार दिया। जब तक दोषी पुलिस वालों को फांसी नहीं होगी, हमें न्याय नहीं मिलेगा। हमें और हमारे परिवार को सुरक्षा दी जाए।'
आगे ने कहा, '17 जून को मेरे बेटे को पुलिस उठाकर ले गई और फिर एनकाउंटर दिखाकर मार दिया। हम न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आयोग के अध्यक्ष ने हमारी बात सुनी है। हमें उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी।'
17 जून 2026 को शाहपुर थाना पुलिस ने बिलौटी गांव में एनकाउंटर में भरत तिवारी को मार गिराने का दावा किया था। पुलिस का कहना था कि भरत कुख्यात अपराधी था और मुठभेड़ में मारा गया, लेकिन परिजन ने शुरू से ही इस एनकाउंटर को फर्जी बताया। उनका आरोप है कि भरत को घर से उठाकर ले जाया गया और बाद में गोली मार दी गई। इस घटना के बाद से ही परिवार और ग्रामीण न्याय की मांग कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा हैं। आयोग को तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
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गवाही के दौरान न्यायिक जांच आयोग कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई थी। आयोग के अधिकारियों ने बताया कि गवाही पूरी तरह गोपनीय तरीके से हुई। परिजनों पर किसी तरह का दबाव न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया।
आंदोलन तेज, 17 जुलाई को जंतर-मंतर पर हस्ताक्षर अभियान
भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर परिजन और सामाजिक संगठनों का आंदोलन भी लगातार चल रहा है। आरा से लेकर पटना तक प्रदर्शन हो चुके हैं। परिजन ने बताया कि अब 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भरत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसमें देशभर से लोग शामिल होंगे और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बिलौटी गांव में इस घटना के बाद से तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिसिया कार्रवाई से लोग डरे हुए हैं। गांव में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भरत तिवारी के साथ जो हुआ, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर वह दोषी था तो उसे कानून के तहत सजा मिलती, लेकिन एनकाउंटर गलत है।
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क्या बोले आयोग के अध्यक्ष?
गवाही के बाद न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोग को जो भी साक्ष्य और गवाही मिलेगी, उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में किसी तरह का दबाव नहीं है और सच सामने लाया जाएगा। फिलहाल भरत तिवारी के परिजनों को न्यायिक जांच से उम्मीद है। मां-बाप की आंखों में बेटे को न्याय दिलाने की आस है। अब देखना होगा कि आयोग की रिपोर्ट में क्या निकलकर सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
