जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर आरा के शाहपुर पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद गांव में आयोजित श्रद्धांजलि एवं महापंचायत सभा में भी शामिल हुए और भरत के लिए न्याय की मांग की। 

 

मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले को मिस हैंडल किया है। अब समाज के दबाव में छोटे अफसरों की बलि चढ़ाकर जान बचाना चाह रही है। उन्होंने कहा, 'परिवार को पैसा और नौकरी नहीं, न्याय चाहिए। न्याय का मतलब थानेदार को सस्पेंड करना या डीएसपी पर एक्शन नहीं है। एनकाउंटर में शामिल तमाम अधिकारियों और नेताओं को भी जांच के दायरे में लाना जरूरी है।'

 

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पटना में बैठे आदेश देने वालों पर हो कार्रवाई 

पीके ने सीधी मांग रखी कि जिन लोगों ने हत्या की, उनके साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने पटना में बैठकर उस बच्चे को मारने का आदेश दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भरत तिवारी गंगा कटाव से विस्थापित हुए जमुनिया गांव के 80 परिवारों को बिजली-पानी दिलाने की लड़ाई लड़ रहे थे, अपनी नहीं। एक साजिश के तहत उनका एनकाउंटर किया गया।

पीके ने सम्राट चौधरी को घेरा 

प्रशांत किशोर ने सीएम सम्राट चौधरी के बयान को असंवेदनशील बताया। उन्होंने कहा, 'सीएम खड़े होकर बोल रहे थे कि डीजीपी ने खबर दी कि एक लड़का बंदूक दिखा रहा है तो मैंने कहा- 'हमारी पुलिस को कोई बंदूक कैसे दिखा रहा है। पीके बोले, संवेदनहीन नेता का बोलना है जो समझता है पुलिसिंग का मतलब गोली चलाना है। पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है, गोली चलाना नहीं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना पड़ेगा।'

 

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'किसकी होगी न्यायिक जांच'

न्यायिक जांच पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने सरकार की न्यायिक जांच की घोषणा पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि अभी तक नहीं बताया कि जांच कौन करेगा? जांच की परिधि क्या होगी? क्या गृह मंत्री की भूमिका की जांच होगी? क्या एसटीएफ के उस अफसर की जांच होगी, जिसने पटना से मारने का आदेश दिया? क्या गोली चलाने के आदेश पर साइन करने वाले मजिस्ट्रेट पर कार्रवाई होगी?

'परिवार अकेला नहीं, पूरा समाज साथ'  

महापंचायत में प्रशांत किशोर ने कहा कि भरत भूषण तिवारी की मां और परिजन अकेले नहीं हैं। उनके साथ पूरा समाज खड़ा है। हम लोग भी इनके साथ खड़े रहेंगे। न्याय लेकर रहेंगे। गौरतलब है कि भरत भूषण की मौत पुलिस एनकाउंटर में हुई थी। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था।