नई कार खरीदने वालों के लिए उपभोक्ता अदालत का एक बड़ा और अहम फैसला आया है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने उस कार डीलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जिसने पूरानी डेमो कार (टेस्ट ड्राइव) को बिल्कुल नई बताकर ग्राहक को बेच दिया था। आयोग ने इसे गंभीर धोखाधड़ी माना और डीलर को आदेश दिया कि वह ग्राहक को ब्याज और मुआवजे सहित 9.2 लाख रुपये से ज्यादा की रकम चुकाए।
यह मामला पंजाब के मोहाली का है। शिकायतकर्ता ने अक्तूबर 2011 में हिंद मोटर्स इंडिया से करीब 7 लाख रुपये में टाटा मैन्जा एलान खरीदी थी। कार मिलने के कुछ समय बाद ही उसमें कई तकनीकी दिक्कतें आने लगीं। बार-बार सर्विस सेंटर जाने के बावजूद समस्याएं दूर नहीं हुईं। बाद में जांच में पचा चला कि यह कार पहले करीब आठ महीने तक टेस्ट ड्राइव वाहन के रूप में इस्तेमाल की जा चुकी थी और 3,248 किलोमीटर चल चुकी थी।
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बिक्री के समय छिपाई गई अहम जानकारी
ग्राहक का आरोप था कि कार बेचते समय डीलर ने यह नहीं बताया कि यह डेमो कार है। न तो रिटेल इनवॉइस और न ही बिक्री प्रमाणपत्र में इसका कोई जिक्र किया गया। यानी जिस गाड़ी को पूरी तरह नई बताकर बेचा गया वह पहले से इस्तेमाल की जा चुकी थी। ग्राहक ने इसके बाद मोहाली जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। वर्ष 2012 में आयोग ने डीलर को कार वापस लेकर पूरी रकम ब्याज सहित लौटाने, 2 लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया।
राज्य आयोग के फैसले पर NCDRC ने लगाई मुहर
डीलर ने इस फैसले को पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। राज्य आयोग ने टाटा मोटर्स को भी जिम्मेदार ठहराया लेकिन मुआवजा घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया। इसके बाद मामला NCDRC पहुंचा। राष्ट्रीय आयोग ने कहा कि कार में किसी तरह का मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं हुआ है। इसलिए निर्माता कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने यह भी माना कि डीलर और कंपनी का रिश्ता सिर्फ कारोबार तक सीमित था और इस पूरे मामले में गलती सिर्फ डीलर की थी।
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NCDRC ने टाटा मोटर्स को राहत देते हुए जिला आयोग का मूल आदेश बहाल कर दिया। साथ ही राज्य आयोग द्वारा मुआवजा घटाने के फैसले को भी गलत ठहराया और डीलर के खिलाफ 2 लाख रुपये का पूरा मुआवजा फिर से लागू कर दिया। डीलर की याचिका भी सुनवाई के दौरान पेश न होने के कारण खारिज कर दी गई।
