राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा और भ्रष्टाचार के मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गुरुवार को बड़ा दावा किया। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने पूर्व में गठित एसआईटी की रिपोर्ट का कथित तौर पर गायब पन्ना नंबर-6 सार्वजनिक किया। संजय सिंह ने दावा किया कि इस पन्ने में मंदिर में चोरी और गबन की परिस्थितियों को लेकर डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट में पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात है तो अनिल मिश्रा और चंपत राय को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

संजय सिंह ने प्रेसवार्ता में कथित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIT) के हवाले से कहा कि मंदिर में 40 दिनों के भीतर 70 बार चोरी हुई और करीब 81 लाख रुपये की बरामदगी हुई। उनका दावा है कि रिपोर्ट में बैंक के साथ तय नियमों में बदलाव और उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में यदि इन घटनाओं और जिम्मेदारियों का उल्लेख है तो बाद में किसी को क्लीन चिट दिए जाने के आधार पर भी सवाल उठते हैं। संजय सिंह ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पन्ना नंबर-6 को लेकर किया बड़ा दावा

संजय सिंह के मुताबिक विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली एसआईटी की रिपोर्ट में पन्ना नंबर-6 मौजूद था, लेकिन बाद में यह पन्ना गायब कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अब यह पन्ना उनके हाथ लगा है और इसी के आधार पर उन्होंने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कथित पन्ने में डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा बैंक के साथ तय नियमों को शिथिल किए जाने का उल्लेख है। संजय सिंह ने दावा किया कि इसी वजह से मंदिर में चोरी और गबन की परिस्थितियां पैदा हुईं।

 

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निर्माण कार्यों में कमीशन का भी आरोप

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मामला केवल जमीन के लेनदेन या चढ़ावे तक सीमित नहीं है। उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों में भी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के हवाले से उन्होंने अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में 40-40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से सवाल किया कि यदि इतने गंभीर आरोप और दस्तावेज सामने आए हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।

26 दस्तावेज SIT को सौंपने की बात

संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्तमान एसआईटी अध्यक्ष किरन एस को पत्र और ईमेल भेजकर मिलने का समय मांगा है। उनका कहना है कि वह एसआईटी को कुल 26 दस्तावेज सौंपना चाहते हैं। इनमें पहले दिए गए 13 दस्तावेजों के अलावा 13 नए दस्तावेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और साक्ष्य मौजूद हैं। संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि इन दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह सभी कागजात लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

जमीन सौदे को लेकर भी उठाए सवाल

सांसद ने राम मंदिर से जुड़े जमीन के एक सौदे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब दो करोड़ रुपये की जमीन को कुछ ही मिनटों में साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा हुआ और इस पर चंपत राय के हस्ताक्षर तथा अनिल मिश्रा की गवाही है। उन्होंने इसे कथित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताते हुए पूरे सौदे की जांच की मांग की।

संजय सिंह ने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर नाराजगी जताते हुए एसआईटी से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान मीडिया में आरोपियों को क्लीन चिट मिलने की खबरें सामने आईं। संजय सिंह ने इसे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला घटनाक्रम बताया।

 

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निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

संजय सिंह ने कहा कि वह राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और चढ़ावे की अनियमितताओं के मुद्दे को दबने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास मौजूद दस्तावेज एसआईटी को दिए जाएंगे और जांच एजेंसी से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है। यदि जांच में इन दस्तावेजों को शामिल नहीं किया गया तो वह इन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।फिलहाल संजय सिंह के दावों और कथित एसआईटी रिपोर्ट के पन्ने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच और संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता इस मामले में अहम होगी।