सूरत मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की वजह से एक डॉक्टर के सुसाइड करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक 30 साल के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने रैगिंग से तंग आकर आत्महत्या कर ली। सूरत मेडिकल कॉलेज ने 10 फर्स्ट-ईयर के छात्रों की रैगिंग करने वाले चार रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है।

 

कॉलेज के अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि रातभर जांच करने के बाद चार सीनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया, जबकि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख समेत चार फैक्ल्टी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

 

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सीनियरों ने भला-बुरा कहा था और अपमानित किया

 

मृतक की पहचान हर्ष पांड्या के रूप में हुई है, जो न्यू सिविल अस्पताल से संबद्ध जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्नातकोत्तर (पीजी) फर्स्ट-ईयर के छात्र थे। वह रविवार सुबह छात्रावास के कमरे में फंदे से लटके पाए गए। जीएमसी के डीन डॉक्टर जयेश ब्रह्मभट्ट ने बताया कि उनकी मौत की जांच करने वाली रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ छात्रों ने उन्हें भला-बुरा कहा था और अपमानित किया था।

 

पिता को दिया न्याय को भरोसा

 

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि घटना की वैज्ञानिक तरीकों से जांच की जा रही है और मृतक के पिता, जो खुद भी एक डॉक्टर हैं, को न्याय का भरोसा दिया गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रैगिंग की घटना में शामिल पाए गए चार वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों- निराली वसावे, अनुज माहेश्वरी, दीक्षिता गेवड़िया और हिना भट को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

 

तुरंत हॉस्टल खाली करने का निर्देश

 

डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने कहा कि इन सभी को तुरंत हॉस्टल खाली करने और निलंबन अवधि के दौरान किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं होने का आदेश दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमैया मुल्ला और तीन अन्य संकाय सदस्यों-डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

 

बयान के अनुसार, रैगिंग रोधी समिति ने रविवार रात साढ़े आठ बजे से सोमवार सुबह चार बजे तक लंबी बैठक की। इस दौरान प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों और मृतक के पिता की शिकायतों के आधार पर वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों, संकाय सदस्यों, तकनीशियनों और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सफाई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।

 

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फर्स्ट-ईयर के छात्रों की शिकायतों पर बयान दर्ज

 

डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'फर्स्ट-ईयर के छात्रों की शिकायतों के आधार पर द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों तथा संकाय सदस्यों के बयान दर्ज किए गए। इन बयानों पर विचार करने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों में रैगिंग की परिभाषा में मौखिक दुर्व्यवहार और अपमान को शामिल किए जाने के आधार पर समिति ने निष्कर्ष निकाला कि पांड्या को रैगिंग का सामना करना पड़ा।'

 

राज्य सरकार को आधिकारिक रिपोर्ट सौंपी

 

उन्होंने कहा, 'इस मामले में मौखिक दुर्व्यवहार और अपमान की पुष्टि हुई है, लेकिन किसी भी शिकायत में शारीरिक उत्पीड़न का जिक्र या सबूत नहीं मिला।' डीन ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर FIR भी दर्ज कराई जाएगी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट को कॉलेज परिषद ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इसकी समीक्षा भी की गई है। सोमवार सुबह राज्य सरकार को आधिकारिक रिपोर्ट सौंप दी गई।