उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में सीबीआई और एनआईए के नाम का डर दिखाकर कारोबारी से करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इंदिरापुरम पुलिस और स्वॉट टीम ने मामले में आईबी के सेवानिवृत्त संयुक्त उपनिदेशक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने एक फर्म के मालिक से मामला निपटाने के नाम पर पहले 15 करोड़ रुपये मांगे और बाद में पांच करोड़ रुपये में सौदा तय कर 55 लाख रुपये वसूल लिए। रकम देने के बाद भी आरोपी लगातार और रुपये मांगते रहे और जेल भेजने, फर्म बंद कराने की धमकी देते रहे।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पंचशील हाईनेस सोसायटी निवासी 64 वर्षीय अनिल प्रताप सिंह, दिल्ली के वसंतकुंज निवासी 36 वर्षीय अंकित द्विवेदी और दिल्ली के जेपी ब्लॉक, पीतमपुरा निवासी 34 वर्षीय सिद्धार्थ जैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार अनिल प्रताप सिंह वर्ष 2022 में आईबी के संयुक्त उपनिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुआ था और उसे गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। वहीं, गिरोह में शामिल अनिकेत उर्फ कबीर सिंह और सलमान अभी फरार हैं। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।
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CBI -NIA के नोटिस को बनाया हथियार
पुलिस के मुताबिक इंदिरापुरम निवासी कारोबारी विकास मित्तल की दिल्ली स्थित फर्म ए टू जेड को CBI-NIA से संबंधित एक नोटिस मिला था। फर्म के मैनेजर योगेश ने अपने परिचित सलमान से इस बारे में चर्चा की। सलमान ने बड़े अधिकारियों से अपनी जान-पहचान होने का दावा करते हुए नोटिस का मामला खत्म कराने का भरोसा दिया।
इसके बाद सलमान और सिद्धार्थ जैन के माध्यम से अनिल प्रताप सिंह से संपर्क कराया गया। आरोप है कि अनिल ने खुद को आईबी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए नोटिस खत्म कराने के नाम पर 15 करोड़ रुपये मांगे। रकम नहीं देने पर कारोबारी को जेल भेजने और फर्म बर्बाद होने का डर दिखाया गया।
5 करोड़ में सौदा, 55 लाख वसूले
पुलिस के अनुसार दबाव बनाए जाने के बाद पांच करोड़ रुपये में मामला निपटाने की बात तय हुई। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी से अलग-अलग तरीके से 55 लाख रुपये वसूल लिए। इसके बाद भी उनकी रकम की मांग जारी रही। बार-बार रुपये मांगने और धमकियां मिलने पर कारोबारी को शक हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की। जांच में पुलिस को पता चला कि रिटायर्ड आईबी अधिकारी अनिल प्रताप सिंह ने अपने बेटे अनिकेत उर्फ कबीर और उसके दोस्त अंकित द्विवेदी को रकम लेने के लिए भेजा था। आरोप है कि दोनों ने कारोबारी को जेल भेजने और फर्म डूब जाने का भय दिखाकर 55 लाख रुपये वसूले।
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CCTV और सुरागों से खुला राज
कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद 2 सितंबर को अनिल प्रताप सिंह, अंकित द्विवेदी और सिद्धार्थ जैन को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.92 लाख रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद की है। पुलिस अब फरार अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान की तलाश कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने इसी तरीके से किसी और कारोबारी या फर्म को तो निशाना नहीं बनाया था।
