संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति में बयानबाजी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने केंद्र सरकार और जेडीयू दोनों पर एक साथ तीखा हमला बोला है। घुसपैठ के मुद्दे से लेकर जेडीयू के अंदर कथित ‘पैसों की राजनीति’ तक, उन्होंने कई ऐसे सवाल उठाए हैं जिनसे बिहार की सियासत फिर गरमा गई है।
शक्ति यादव ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास सभी संवैधानिक और प्रशासनिक शक्तियां हैं, इसके बावजूद अगर घुसपैठ हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
चुनाव खत्म होते ही मुद्दा अचानक गायब क्यों?
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब चुनाव आते हैं, तब बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाता है लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा अचानक गायब क्यों हो जाता है। उनके मुताबिक देश, सीमाएं और हालात वही रहते हैं, फिर यह मुद्दा सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित क्यों रह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की राजनीति के लिए करती है।
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आनंद मोहन के बयान को बताया सच
घुसपैठ के मुद्दे के बाद शक्ति यादव ने बिहार की अंदरूनी राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने पूर्व सांसद आनंद मोहन के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें जेडीयू पर पैसे लेकर मंत्री बनाने का आरोप लगाया गया था। आनंद मोहन ने हाल ही में कहा था कि जेडीयू में थैली लेकर आने वालों को मंत्री पद दिया जाता है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शक्ति यादव ने कहा कि आनंद मोहन बिल्कुल सही बात कह रहे हैं और जेडीयू के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
जेडीयू को भीतर से खत्म करने की साजिश
शक्ति यादव ने दावा किया कि जेडीयू के अंदर ही पार्टी को कमजोर करने और समाप्त करने की साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
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राजनीतिक जानकार इसे आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ती बयानबाजी और नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। खासकर इसलिए भी क्योंकि कभी जेडीयू के करीबी माने जाने वाले आनंद मोहन अब खुलकर आरजेडी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
आरजेडी लंबे समय से बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों में तनाव होने का दावा करती रही है। ऐसे में शक्ति यादव का यह बयान सिर्फ राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि चुनाव से पहले विपक्ष की रणनीतिक आक्रामकता का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार पर घुसपैठ रोकने में विफल रहने का आरोप, तो दूसरी तरफ जेडीयू के भीतर पैसों और साजिश की राजनीति का दावा। इन दोनों मुद्दों ने बिहार की राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर जेडीयू और बीजेपी की प्रतिक्रिया भी सियासी माहौल को और गर्म कर सकती है।
