बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी मामला सामने आया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। विधान परिषद चुनाव (MLC) में टिकट न मिलने से नाराज शिवचंद्र राम काफी आहत दिखे। उन्होंने भावुक होकर अपनी नाराजगी जताई और पार्टी नेतृत्व पर अनदेखी और वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
वैशाली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवचंद्र राम भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि पिछले चार दिनों से वह ठीक से सो नहीं पाए हैं और मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं।
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पूर्व मंत्री ने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन 1990 में राजद से ही शुरू हुआ था। वह लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के सामाजिक न्याय के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हर फैसले का पालन किया लेकिन इस बार उनके साथ अन्याय हुआ।
आखिरी वक्त पर किया गया किनारा
शिवचंद्र राम ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें जिम्मेदारी देने का भरोसा दिया था लेकिन अंतिम समय में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक समर्पित कार्यकर्ता होने के बावजूद उन्हें उपेक्षित महसूस कराया गया। उन्होंने एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि यह केवल उनका व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि उन कार्यकर्ताओं की भी पीड़ा है जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
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हालांकि, उन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के प्रति सम्मान जताया और कहा कि पार्टी ने उन्हें पहचान दी, जिसके लिए वह आभारी रहेंगे। लेकिन मौजूदा हालात में पद पर बने रहना उनके आत्मसम्मान के खिलाफ है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह नाराजगी यहीं थमेगी या आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा और बढ़ेगा।
