जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डाक विभाग को एक ग्राहक का पार्सल खोने के मामले में 1.20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पार्सल में तीन पश्मीना शॉल थीं, जिनकी कुल कीमत करीब 60 हजार रुपये बताई गई थी। यह मामला एम/एस ऑलिव कूचर की मालिक मेहविश अशरफ से जुड़ा है।

 

उन्होंने अपने ग्राहक को डाक विभाग के जरिए एक पार्सल भेजा था लेकिन वह तय पते तक कभी नहीं पहुंचा। बाद में पार्सल को ट्रांजिट के दौरान गायब बताया गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में मामला दायर किया।

 

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डाक विभाग ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान डाक विभाग ने कहा कि पार्सल में रखे सामान की कीमत और विवरण स्पष्ट रूप से घोषित नहीं किए गए थे और उसका बीमा भी नहीं कराया गया था। विभाग ने भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 की धारा 6 का हवाला देते हुए कहा कि वह नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है। हालांकि, आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि स्पीड पोस्ट जैसी भुगतान वाली सेवाओं में पार्सल की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करना डाक विभाग की जिम्मेदारी है। रिकॉर्ड में भी यह दर्ज था कि पार्सल खो गया था।

रिकॉर्ड से साबित हुआ पार्सल में थीं शॉल

आयोग ने पार्सल की रसीद का भी उल्लेख किया। जिसमें उसका वजन 10,510 ग्राम दर्ज था। इससे यह साबित हुआ कि उसमें तीन पश्मीना शॉल रखी गई थीं। आयोग ने कहा कि डाक विभाग को पार्सल की सुरक्षा और समय पर डिलीवरी के लिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए थी।

 

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आयोग ने डाक विभाग को 60 हजार रुपये शॉल की कीमत, 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए तथा 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। कुल 1.20 लाख रुपये की राशि 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी। देरी होने पर इस पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लगेगा।