संजय सिंह, पटना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का प्रस्तावित मुंगेर प्रवास संगठनात्मक और वैचारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर होने वाले इस दौरे में वे स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संगठन की भावी दिशा, राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका और सामाजिक दायित्वों पर विस्तृत मार्गदर्शन देंगे।

 

संघ सूत्रों के अनुसार, मोहन भागवत स्वयंसेवकों को संगठन की मूल विचारधारा, शताब्दी वर्ष के उद्देश्यों और समाज जीवन में संघ की बढ़ती भूमिका को लेकर विशेष संदेश देंगे। साथ ही संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता तथा विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने जैसे विषय भी उनके संबोधन के केंद्र में रहेंगे।

 

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संगठन को मजबूत बनाने पर रहेगा जोर

प्रवास के दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ कई दौर की बैठकों की भी संभावना है। इन बैठकों में संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने, नए स्वयंसेवकों को जोड़ने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने तथा आगामी गतिविधियों को लेकर व्यापक चर्चा की जाएगी। संघ नेतृत्व का मानना है कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि संगठन की पहुंच और प्रभाव को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प वर्ष है। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर रणनीति तैयार की जा रही है।

 

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राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय

मोहन भागवत का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। ऐसे में संघ प्रमुख का मुंगेर प्रवास केवल संगठनात्मक कार्यक्रम भर नहीं माना जा रहा, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

 

हालांकि संघ अपने कार्यक्रमों को सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित बताता रहा है, फिर भी भागवत के दौरे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है। संघ प्रमुख अपने प्रवास के दौरान स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे और संगठन की भावी कार्ययोजना को लेकर उनका मार्गदर्शन करेंगे।