पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके संपर्क में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद और विधायक हैं। मगर, उन्होंने कहा कि राज्य में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी में शामिल होने के इच्छुक कई मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सांसदों और विधायकों के लिए फिलहाल दरवाजे बंद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में बेदाग नेताओं के बीजेपी में आने की संभावना खुली है। 

 

उन्होंने कहा कि राजनीति में 'दो और दो हमेशा चार नहीं होते'। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि अपने दम पर स्पष्ट जनादेश हासिल करने के बाद पार्टी पर अब विरोधी दलों के नेताओं को शामिल करने का कोई दबाव या मजबूरी नहीं है। उन्होंने 'अच्छी तृणमूल कांग्रेस' और 'बुरी तृणमूल कांग्रेस' के बीच किसी भी तरह के अंतर को खारिज कर दिया।

 

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'बिना अल्पसंख्यकों के भी सरकारें बनाई सकती हैं'

उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर हुए दलबदल के अपने अनुभव से सबक सीखा है और भविष्य में उनसे मिली सीख को ध्यान में रखेगी। बंगाल में राजनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि अल्पसंख्यक वोट पर निर्भर हुए बिना भी सरकारें बनाई जा सकती हैं और उन्होंने तर्क दिया कि बीजेपी के दो-तिहाई बहुमत ने राज्य के चुनावी समीकरण को बदल दिया है।

'हमें किसी की जरूरत नहीं'

किसी नेता का नाम लिए बिना और कोई संख्या बताए बिना भट्टाचार्य ने कहा, 'तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद और विधायक हमारे साथ जुड़ने को तैयार हैं, लेकिन मैं संख्या पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। अभी दरवाजे बंद है। हमें चुनाव जीतने के लिए अब किसी तृणमूल कांग्रेस नेता की जरूरत नहीं है। हम अपने दम पर जीते हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी को बाहरी नेताओं की ज्यादा जरूरत नहीं है। 

 

यह पूछे जाने पर कि क्या भविष्य में पार्टी का रुख बदल सकता है, तो समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'राजनीति में, दो और दो हमेशा चार नहीं होते; हम किसी भी दागी नेता के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलेंगे... यह फैसला सामूहिक होगा, किसी एक व्यक्ति का नहीं।' उन्होंने कहा कि अगर पार्टी आखिरकार नए सदस्यों पर विचार करती भी है, तो भ्रष्टाचार के आरोपों, भर्ती घोटालों में संलिप्तता या तृणमूल कांग्रेस के कथित गिरोह नेटवर्क से जुड़े लोगों का स्वागत नहीं किया जाएगा।

 

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टीएमसी नेताओं से साथ दिया

टीएमसी कार्यकर्ताओं के बारे में अपना रुख स्पष्ट करते हुए भट्टाचार्य ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के किसी भी वर्ग को अच्छी तृणमूल कांग्रेस या बुरी तृणमूल कांग्रेस के रूप में वर्गीकृत किया है। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी नहीं कहा कि कोई अच्छी तृणमूल कांग्रेस है या बुरी तृणमूल कांग्रेस है। तृणमूल कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग भ्रष्टाचार से अछूता रहा और उन्होंने चुनाव में भाजपा का समर्थन किया।

 

भट्टाचार्य ने कहा, ‘ऐसे लोग हैं, जो तृणमूल का हिस्सा थे, लेकिन उस भ्रष्ट व्यवस्था से बाहर रहे। उनमें से कई ने हमें वोट दिया।’ उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों के भविष्य में भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होने का निर्णय पार्टी सामूहिक रूप से लेगी, न कि कोई नेता व्यक्तिगत रूप से लेगा। भट्टाचार्य ने कहा कि मुसलमानों को अपनी अल्पसंख्यक मानसिकता त्याग देनी चाहिए और खुद को सबसे पहले नागरिक के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के दो-तिहाई बहुमत ने यह साबित कर दिया है कि अल्पसंख्यक वोट पर निर्भर हुए बिना भी सरकारें बनाई जा सकती हैं।