अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए पैसों की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद कर दी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर संबंधित मजिस्ट्रेट को आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने एसआईटी जांच पर दाखिल याचिकाओं का निपटारा कर दिया। ये याचिकाएं मामले की स्वतंत्र जांच और CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई थीं।
राम मंदिर में चढ़ावे के पैसों की गिनती के दौरान गड़बड़ी और चोरी की शिकायतें सामने आई थीं। इस मामले में आरोप था कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रकम में से कुछ पैसे गिनती के दौरान ही निकाल लिए जाते थे। इसके बाद देशभर में राजनीतिक बवाल शुरू हो गया। मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी निगरानी की।
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कोर्ट में क्या हुआ?
इस मामले पर 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। सोमवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि SIT की जांच में चढ़ावे की गिनती के दौरान पैसों की हेराफेरी की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर इस पैसे से संपत्तियां खरीदीं, जबकि कुछ ने रकम बैंक खातों में जमा कर रखी थी।
SIT रिपोर्ट में क्या?
कोर्ट में बताया गया कि इस मामले की जांच में मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई थी। SIT के मुताबिक, फुटेज में चढ़ावे की गिनती के दौरान 105 बार कैश को कथित तौर पर गलत तरीके से निकालने या छिपाने की घटनाएं सामने आईं। जांच टीम ने इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया है।
जांच के दौरान बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों की भी पड़ताल की गई। SIT ने इन सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से कथित तौर पर जुड़ी करीब 79.85 लाख रुपये की रकम भी बरामद की गई है। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
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याचिकाकर्ताओं की मांग क्या थी?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें चढ़ावे की कथित हेराफेरी की स्वतंत्र जांच कराने, CBI जांच और मंदिर को मिले दान का फॉरेंसिक ऑडिट कराने जैसी मांगें शामिल थीं। कुछ याचिकाकर्ताओं ने मंदिर में मिले पैसों और कीमती सामान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ मंदिर में चढ़ावा देते हैं, इसलिए इस पैसे के इस्तेमाल और रखरखाव में पारदर्शिता होनी चाहिए। कोर्ट ने मामले में जांच को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचाने पर जोर दिया था और जांच के लिए SIT गठित करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने दिए आदेश
सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जनहित का पहलू भी जुड़ा हुआ है। इसलिए याचिकाकर्ता कानून के तहत निचली अदालत की कार्यवाही में मदद कर सकते हैं। कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को चार्जशीट पर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
